समाचार

बागीदौरा की ब्रह्मचारी मणिबाई बनी क्षुल्लिका पर्याप्तश्री माताजी : संल्लेखना पूर्वक हुआ समाधिमरण


बागीदौरा की ब्रह्मचारी मणिबाई का समाधिमरण सल्लेखनापूर्वक ग्यारह प्रतिमा के साथ मध्यप्रदेश के पिसनहारी की मढ़ियाजी जैन तीर्थ जबलपुर में आर्यिका आदर्श मति माताजी के ससंघ सानिध्य में 26 फरवरी को हो गया है। अंतिम समय में उन्हें ब्रह्मचारी से क्षुल्लिका दीक्षा दी गई। जबलपुर के मढिया जी में डोल यात्रा निकाली गई।


बागीदौरा। कस्बे की व्रती ब्रह्मचारिणी मणिबाई का समाधिमरण सल्लेखनापूर्वक ग्यारह प्रतिमा के साथ मध्यप्रदेश के पिसनहारी की मढ़ियाजी जैन तीर्थ जबलपुर में आदर्श मति माताजी के ससंघ सानिध्य में 26 फरवरी रात 8:01 बजे हो गया है। अंतिम समय में ब्रह्मचारी से क्षुल्लिका दीक्षा दी गई और डोंगरगढ़ मैं विराजमान निर्यापक श्रमण समय सागर महाराज ने ‘ क्षुल्लिका 105 पर्याप्तश्री माताजी नामकरण किया। मंगलवार को मढ़िया जी में क्षुल्लिका की डोल यात्रा निकाल कर पंचतत्व में देह विलीन हुआ। इस दौरान बागीदौरा से गृहस्थ जीवन के रिश्तेदार सहित बड़ी संख्या में भक्तजन भी शामिल हुए। आचार्य की समाधि से कुछ समय पहले डोंगरगढ़ से जबलपुर पहुंची थी। जहां समाधिमरण हुआ। खास यह कि आचार्य के हर कार्यक्रम में मणिबाई पहुंचती थी, उन्हें सभी लोग बाइजी कहकर पुकारते थे। बाइजी की बदौलत से ही आचार्य विद्यासागर वागड़ से परिचित थे। साथ ही अपने शिष्यों को धर्म प्रभावना के लिए भेजा। तभी वागढ़ को बुंदेलखंड को उपमा दी गई। वागढ़ के कई साधु, संत, व्रतिधारी भी गृहत्याग, सुख संसार, वैभव छोड़ धर्म पथ पर निकले।

अल्पायु में व्रत लेकर चुना वैराग्य पथ

मणिबाई का जन्म 1940 में धर्मनगरी बागीदौरा में हुआ था। वैवाहिक जीवन के अल्पकाल में ही पति का देहांत हो गया। इसके बाद ज्ञानसागर महाराज के सानिध्य में धर्मध्यान, त्याग, समर्पण के संकल्प के साथ आध्यात्म, वैराग्य को राह चुन ब्रह्मचर्य व्रत लिया। आचार्य ज्ञानसागर के बाद 1972 में आचार्य विद्यासागर को अपना गुरु बनाया, ब्रह्मचर्य व्रत और प्रतिमा के व्रत स्वीकार किए। साथ ही ब्राह्मी विद्या आश्रम की संचालिका का दायित्व भी मिला। जिसमें निर्देशन और अनुशासनात्मक मार्गदर्शन में सैकड़ों बहनों ने अपने जीवन को धन्य किया। आर्यिका पद प्राप्त किया। इनके जीवन से संदर्भित विशेष संस्मरण समाधि मति की समाधि नामक पुस्तक में संकलित हैं।

आप को यह कंटेंट कैसा लगा अपनी प्रतिक्रिया जरूर दे।
+1
2
+1
0
+1
0
Shreephal Jain News

About the author

Shreephal Jain News

Add Comment

Click here to post a comment

You cannot copy content of this page