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श्री आदिनाथ जैन मंदिर में भक्तामर स्तोत्र पाठ: भगवान मल्लिनाथ के कल्याणकों का हुआ श्रद्धापूर्वक आयोजन


श्री आदिनाथ जैन मंदिर परिसर में आदिनाथ महिला मंडल द्वारा प्रतिदिन आयोजित हो रहे श्री भक्तामर स्तोत्र पाठ का आयोजन मंगलवार को अत्यंत श्रद्धा, भक्ति और सौहार्दपूर्ण वातावरण में हुआ। अंबाह से पढ़िए, अजय जैन की यह खबर…


अंबाह। श्री आदिनाथ जैन मंदिर परिसर में आदिनाथ महिला मंडल द्वारा प्रतिदिन आयोजित हो रहे श्री भक्तामर स्तोत्र पाठ का आयोजन मंगलवार को अत्यंत श्रद्धा, भक्ति और सौहार्दपूर्ण वातावरण में हुआ। मंदिर परिसर में सुबह से ही भक्तों की आवाजाही शुरू हो गई थी, जहां शांत वातावरण में भक्तिमय ध्वनि गूंज रही थी। नियमित आयोजित हो रहे इस स्तोत्र पाठ का उद्देश्य समाज में आध्यात्मिक चेतना, मानसिक शांति और सकारात्मकता को बढ़ावा देना है। भक्तामर स्तोत्र पाठ के दौरान बड़ी संख्या में श्रद्धालु उपस्थित हुए। महिला मंडल की सदस्यों ने बताया कि पाठ से न केवल धार्मिक आस्था बढ़ती है, बल्कि जीवन में आने वाली कठिन परिस्थितियों से निपटने के लिए मनोबल और ऊर्जा भी प्राप्त होती है। मंदिर परिसर में दीप, और मंत्रोच्चार के साथ अत्यंत दिव्य और शांति पूर्ण वातावरण का निर्माण हुआ।

मल्लिनाथ भगवान का जन्म एवं तप कल्याणक मनाया 

यह दिन विशेष इसलिए भी रहा क्योंकि मंदिर में जैन धर्म के उन्नीसवें तीर्थंकर भगवान मल्लिनाथ के जन्म और तप कल्याणक का उत्सव मनाया गया। कार्यक्रम के अंतर्गत भगवान का अभिषेक, शांतिधारा, विशेष पूजन एवं देव शास्त्र पूजा की गई। श्रद्धालुओं ने मंगलाचरण, स्तवन और भक्ति-गीतों के साथ आराधना में भाग लेकर कल्याणकों की शुभता का लाभ लिया। इस अवसर पर मंदिर समिति की सदस्य ऊषा भंडारी ने भगवान मल्लिनाथ के जीवन चरित्र का वर्णन करते हुए बताया कि भगवान का जन्म मार्गशीर्ष शुक्ल पक्ष एकादशी को मिथिला पुरी में राजा कुम्भ और रानी रक्षिता देवी के यहां हुआ था। उन्होंने बताया कि भगवान मल्लिनाथ ने 55 हजार वर्ष की आयु में दीक्षा ग्रहण की थी और मात्र 6 दिनों के कठोर तप के बाद केवलज्ञान प्राप्त किया। इसलिए जन्म और तप दोनों कल्याणक इसी तिथि पर मनाए जाते हैं।

धार्मिक उन्नति के लिए अत्यंत सार्थक 

इस पावन अवसर पर अनिल कुमार जैन, बबीता जैन, ज्योति जैन, शौर्य जैन एवं काव्या जैन के परिवार ने भक्तामर स्तोत्र पाठ करवाने की सेवा निभाई। परिवार के सदस्यों ने भगवान के समक्ष क्षेत्र और समाज में सुख-शांति, समृद्धि और सद्भावना की कामना की। मंदिर समिति के अनुसार निरंतर पाठ से पूरे परिसर में आध्यात्मिक ऊर्जा, मनोबल और दिव्यता का विशेष अनुभव हो रहा है। महिलाओं द्वारा किए जा रहे इस आयोजन की समाज के सभी वर्गों ने प्रशंसा की और इसे धार्मिक उन्नति के लिए अत्यंत सार्थक बताया।

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