जहां आज के समय में अधिकांश बच्चे मोबाइल पर गेम या अन्य मनोरंजन के साधनों में अपनी छुट्टियां व्यतीत कर रहे हैं, वहीं आचार्य श्री वर्धमान सागर पाठशाला, सनावद के बच्चों ने मोबाइल का सकारात्मक उपयोग करते हुए रील के माध्यम से ज्ञानवर्धक संदेश देने की पहल की है। पढ़िए सन्मति जैन काका की रिपोर्ट…
सनावद। जहां आज के समय में अधिकांश बच्चे मोबाइल पर गेम या अन्य मनोरंजन के साधनों में अपनी छुट्टियां व्यतीत कर रहे हैं, वहीं आचार्य श्री वर्धमान सागर पाठशाला, सनावद के बच्चों ने मोबाइल का सकारात्मक उपयोग करते हुए रील के माध्यम से ज्ञानवर्धक संदेश देने की पहल की है।

महोत्सव की सार्थकता पर दिया संदेश
पाठशाला के बच्चों ने अपनी ग्रीष्मकालीन छुट्टियों का सदुपयोग करते हुए जैन धर्म के सबसे बड़े महोत्सव—भगवान महावीर स्वामी जन्म कल्याणक—की महत्ता को प्रस्तुत किया। उन्होंने बताया कि महावीर स्वामी के जन्म कल्याणक को किस प्रकार मनाया जाए और इसका जैन धर्म में क्या महत्व है, इन विषयों को विशेष रूप से रील के माध्यम से दर्शाया गया है।
समाज के लिए बनी प्रेरणादायक पहल
बच्चों द्वारा तैयार की गई यह रील समाज के लिए एक सार्थक एवं प्रेरणादायक पहल सिद्ध हो रही है, जो नई पीढ़ी को धर्म से जोड़ने का प्रभावी माध्यम बन सकती है। इस रील के निर्माण में विशेष रूप से गवाक्षी जैन का सहयोग रहा। इसके साथ ही विधान जैन, कुश जैन, लक्षित जैन, सर्वज्ञ जैन, युवान जैन एवं आराध्या जैन का भी महत्वपूर्ण योगदान रहा।













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