अधिमास में धार्मिक अनुष्ठानों के तहत नगर के नसियांजी जिनालय में सामूहिक श्री नवग्रह शांति विधान का भव्य आयोजन विभिन्न कार्यक्रमों के साथ हर्षोल्लास पूर्वक संपन्न हुआ। मुरैना से पढ़िए, मनोज जैन नायक की यह खबर…
मुरैना। अधिमास में धार्मिक अनुष्ठानों के तहत नगर के नसियाजी जिनालय में सामूहिक श्री नवग्रह शांति विधान का भव्य आयोजन विभिन्न कार्यक्रमों के साथ हर्षोल्लास पूर्वक संपन्न हुआ। विधान के संदर्भ में राजकुमार जैन (कुथियाना वाले) ने बताया कि जैन दर्शन में नवग्रह विधान का अपना एक अलग ही महत्व है। इस विधान को भक्तिभाव पूर्वक करने से पापों का क्षय होता है और जीवन में सुखों की प्राप्ति होती है। अधिमास में सामूहिक नवग्रह विधान में मांगलिक कार्यक्रमों के तहत प्रातः 6.30 बजे श्री जिनेन्द्र प्रभु के अभिषेक, शांतिधारा एवं नित्यमह पूजन के पश्चात विधान का शुभारंभ हुआ। विधान की सभी धार्मिक क्रियाएं जैन विद्वत पंडित महेंद्रकुमार शास्त्री सिहोनिया ने सम्पन्न कराई। विधानाचार्य महेंद्रकुमार शास्त्री ने बताया कि जैन दर्शन में नव ग्रह विधान का उद्देश्य खगोलीय ग्रहों को पूजना या उनसे भौतिक लाभ मांगना नहीं है, बल्कि अशुभ कर्मों के कारण जीवन में आने वाली बाधाओं को दूर करना है। जैन धर्म के अनुसार नवग्रह स्वयं किसी का भला या बुरा नहीं करते है, बल्कि जीवों के अपने कर्मों का फल देते हैं। इन ग्रहों की शांति के लिए जैन तीर्थंकरों की पूजा अर्चना और भक्ति की जाती है। जैन दर्शन में धार्मिक अनुष्ठानों का मुख्य उद्देश्य आत्मा को शुद्ध करना और मोक्ष प्राप्त करना है। जैन धर्म में धार्मिक अनुष्ठान किसी बाहरी ईश्वर से वरदान पाने के लिए नहीं, बल्कि स्वयं के भीतर छिपे गुणों को जगाने के लिए किए जाते हैं। ये हमें ‘रत्न-त्रय’ – सम्यक दर्शन, सम्यक ज्ञान, और सम्यक चरित्र के मार्ग पर चलने में मदद करते हैं। धार्मिक अनुष्ठानों का सामूहिक आयोजन करने से समाज को कई महत्वपूर्ण आध्यात्मिक लाभ मिलते हैं। अनुष्ठानों से बुरे कर्म कटते हैं, पापों का नाश होता है, पुण्य का संचय होता है, क्रोध और अहंकार कम होता है, ये मन को शांत और एकाग्र बनाते है, सांसारिक मोह-माया से दूर करते हैं।
भक्ति में झूमे बंधु, बालक और महिलाएं
श्री नवग्रह शांति विधान के अवसर पर श्री जिनेन्द्र प्रभु के मस्तिष्क पर प्रथम कलश से अभिषेक करने का सौभाग्य राजेशकुमार, मनीष, विकास जैन पलपुरा एवं प्रथम शांतिधारा दिनेशचंद, विशाल जैन आगरा एवं द्वितीय शांतिधारा सामूहिक विधानकर्ता परिवार को प्राप्त हुआ । संगीत की स्वर लहरी की मधुर धुन पर सौरभ एण्ड पार्टी ने मधुर भजनों की प्रस्तुति दी। भजनों की मधुर धुन पर झूमते हुए साधर्मी बंधुओं, माता बहनों एवं बच्चों ने भक्तिमय नृत्य किए। विधान के समापन पर श्रावक श्रेष्ठियों द्वारा विधानाचार्य महेंद्रकुमार शास्त्री सिहोनिया एवं भजन गायक संगीतकार सौरभ जैन का बहुमान किया गया। कार्यक्रम पश्चात उपस्थित सभी को प्रसादी का वितरण किया गया।
नवग्रह विधान कराने का मुख्य उद्देश्य
जैन दर्शन में श्री नवग्रह शांति विधान एक धार्मिक अनुष्ठान के रूप में भक्ति पूर्वक किया जाता है । जिसका मुख्य उद्देश्य कर्मों के उदय से मिलने वाले अशुभ ग्रहों के प्रभावों और कष्टों को शांत करना है । जैन परंपरा में ग्रहों को साक्षात् फल देने वाला न मानकर, उन्हें जीव के कर्मों का सूचक माना जाता है। इस विधान में सीधे ग्रहों की पूजा करने के बजाय, नौ ग्रहों से जुड़े कष्टों को दूर करने के लिए 24 तीर्थंकरों में से विशेष तीर्थंकरों का स्मरण और पूजन किया जाता है । प्रत्येक ग्रह के दोष निवारण के लिए विशिष्ट जैन मंत्रों और नवग्रह शांति स्तोत्र का पाठ किया जाता है । यह अनुष्ठान भौतिक लाभों के लिए नहीं, बल्कि मानसिक शांति, बाधाओं के निवारण और धर्म में अटूट विश्वास बनाए रखने के लिए किया जाता है।
नवग्रह शांति विधान में प्रत्येक ग्रह की शांति के लिए अलग-अलग तीर्थंकरों की पूजन भक्ति वंदना की जाती है।













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