आचार्यों ने कहा है कि धर्म तो प्रारंभ से ही करना चाहिए। बुढ़ापे में जब आपके अंग शिथिल हो जाएंगे तो धर्म की उपासना कैसे होगी। यह उद्गार आचार्यश्री विराग सागरजी महाराज के शिष्य उपाध्याय विहसंतसागरजी महाराज ने बड़े जैन मंदिर में धर्मसभा को संबोधित करते हुए व्यक्त किए। मुरैना से पढ़िए, मनोज जैन नायक की यह खबर…
मुरैना। वर्तमान में सांसारिक प्राणी धर्म को भी अपने अनुसार चलाने के लिए प्रयासरत रहता है। आजकल के युवा कहते हैं कि धर्म तो बुढ़ापे में किया जाता है। बाल्यकाल तो खेलने-कूदने और यौवन अवस्था तो मौज-मस्ती के लिए होती है जबकि, आचार्यों ने कहा है कि धर्म तो प्रारंभ से ही करना चाहिए। बुढ़ापे में जब आपके अंग शिथिल हो जाएंगे तो धर्म की उपासना कैसे होगी। यह उद्गार आचार्यश्री विराग सागरजी महाराज के शिष्य उपाध्याय विहसंतसागरजी महाराज ने बड़े जैन मंदिर में धर्मसभा को संबोधित करते हुए व्यक्त किए। उन्होंने कहा कि आपकी आंखों की रोशनी कम हो जाएगी, आपको दिखाई ही नहीं देगा, आपके हाथ पैर कमजोर हो जाएंगे, कानों से सुनाई कम देगा तो धर्म की आराधना कैसे कर पाओगे। इसलिए धर्म को प्रारंभ से ही अपनाना चाहिए।
धार्मिक अनुष्ठान क्रियाकलाप में डूब जाएं
धर्म के अपने सिद्धांत होते हैं, अपनी परंपराएं, रीति होती हैं, नियम होते हैं, उन्हें उन्हीं के अनुसार पालन करना चाहिए लेकिन, वर्तमान में सभी लोग धार्मिक क्रियाकलापों को भूलते जा रहे हैं और अपने-अपने अनुसार धर्म की व्याख्या कर रहे हैं। जब भी हम कोई धार्मिक अनुष्ठान या क्रियाकलाप करें तो हमें उसमें डूब जाना चाहिए। पूरी निष्ठा श्रद्धा और भक्ति के साथ प्रभु की आराधना करते हुए नि:स्वार्थ भावना से क्रियाएं करना चाहिए।
इस संसार में अच्छे कार्य करने चाहिए
संघस्थ मुनिश्री विश्वसाम्य सागरजी महाराज ने भी अपने आशीष वचनों में कहा कि इस संसार में जन्म लिया है तो कुछ अच्छे कार्य करना चाहिए। तभी आपका मानव पर्याय में जन्म लेना सार्थक होगा। जब तक आप जीवित हैं, तब तक भले ही आपके सामने कोई कुछ न बोले, लेकिन आपके इस संसार से विदा होने के बाद आपके अच्छे कार्य ही शेष रह जाएंगे। आपका यश और अपयश ही आपके जीवनकाल की गाथा को लिखेगा। यदि आपने अच्छे कार्य किए होंगे तो आपकी दूसरे जन्म में किसी अन्य पर्याय में भी सुख शांति की प्राप्ति होगी और मानव जीवन प्राप्त करने के बाद भी अपने गलत और अन्याय पूर्ण कार्य किए तो इस लोक के साथ साथ परलोक में भी आपकी दुर्गति होना निश्चित है।













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