भावना भाव नासनी होती है। विचार विचार को पैदा करते हैं, मधुर वाणी मधुर वाणी को पैदा करती है,आचरण आचरण को पैदा करता है,पैसा पैसे को पैदा करता है। इसलिए हमेशा...
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विवेकपूर्ण व्यक्ति संसार में यश प्राप्त करते हैं और अविवेकी व्यक्ति उपहास के पात्र बनते हैं। किसी भी कार्य को करने से पूर्व व्यक्ति को अपने विवेक का इस्तेमाल...
आचार्यों ने कहा है कि धर्म तो प्रारंभ से ही करना चाहिए। बुढ़ापे में जब आपके अंग शिथिल हो जाएंगे तो धर्म की उपासना कैसे होगी। यह उद्गार आचार्यश्री विराग सागरजी...
हमें जीवन में यदि सकारात्मक परिर्वतन चाहिए तो भगवान महावीर, मर्यादा पुरुषोत्तम श्रीराम, श्रीकृष्ण एवं अन्य महापुरुषों के आदर्शों पर चलना होगा। जब हममें...
बड़े जैन मंदिर में पांच माह तक धर्म प्रभावना करने के बाद रविवार को अंतिम दिन मुनिश्री विलोकसागरजी महाराज ने धर्मसभा को संबोधित करते हुए कहा कि सांसारिक प्राणी...
सिद्धों की आराधना पूजा भक्ति उपासना के अनुष्ठान के अवसर पर बड़े जैन मंदिर में मुनिश्री विलोकसागरजी महाराज ने धर्मसभा में कहा कि पुण्योदय से ही हम सभी को मनुष्य...
आठ दिवसीय श्री सिद्धचक्र महामंडल विधान के शुभारंभ से पूर्व बड़े जैन मंदिर में मुनिश्री विलोकसागरजी महाराज ने धर्मसभा को संबोधित करते हुए कहा कि जीवन में कैसी भी...
मुनिश्री विलोकसागरजी महाराज ने बड़े जैन मंदिर में सिद्धांत ग्रंथ ‘समयसार’ की व्याख्या करते हुए कहा कि विपरीत परिस्थितियों में मन की स्थिति को अनुकूल रखना भी एक...
भगवान न किसी का अच्छा करते हैं, न किसी का बुरा करते हैं। भगवान न किसी को सुख देते हैं, न किसी को दुख देते हैं। यह सब तो प्राणी मात्र के कर्मों पर निर्भर करता...
मुनिश्री विलोकसागरजी महाराज ने बड़े जैन मंदिर में धर्मसभा को संबोधित करते हुए कहा कि सांसारिक प्राणी को अपने कर्मों के परिणामों से डरना चाहिए। भले ही वह ईश्वर...








