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विश्व शांति के लिए मांगतुगाचार्य रचित भक्तामर स्तोत्र पाठ : श्रद्धा आस्था और आत्मिक ऊर्जा का दिव्य माध्यम है भक्तामर स्तोत्र


अंतरराष्ट्रीय भक्तामर स्तोत्र दिवस के पावन अवसर पर विश्व में सभी जगह एक समय एक साथ भक्तामर पाठ का आयोजन किया गया। कुचामन सिटी में श्री जैन वीर मंडल के तत्वावधान में भव्य कार्यक्रम हुआ। इसका शुभारंभ दीप प्रज्वलित कर सुबह 9 बजकर 9 मिनट 9 सेकंड पर भक्तामर काव्य पाठ किया गया। कुचामनसिटी से पढ़िए, सुभाष पहाड़िया की खबर…


कुचामन सिटी। अंतरराष्ट्रीय भक्तामर स्तोत्र दिवस के पावन अवसर पर विश्व में सभी जगह एक समय एक साथ भक्तामर पाठ का आयोजन किया गया। कुचामन सिटी में श्री जैन वीर मंडल के तत्वावधान में भव्य कार्यक्रम हुआ। इसका शुभारंभ दीप प्रज्वलित कर सुबह 9 बजकर 9 मिनट 9 सेकंड पर भक्तामर काव्य पाठ किया गया। भक्तामर स्तोत्र केवल शब्दों का संग्रह नहीं, बल्कि श्रद्धा आस्था और आत्मिक ऊर्जा का दिव्य माध्यम है। भक्तामर काव्य पाठ स्तुति करने से पापों का क्षय, दुखों का हनन सब संकट दूर होते हैं और कार्य सिद्धि। सुख समृद्धि आती है और अनेक बीमारियों से मुक्ति मिलती है। प्राकृतिक विपत्तियां पूरे विश्व में आ रही उसे रोकने में कारगर साबित होगा। इसकी वल्गनाओं से आपदा संकट टलते हैं। इसी भावना से भक्तामर काव्य पाठ किया गया। कार्यक्रम का आयोजन पुरानी धान मंडी स्थित नागौरी मंदिर परिसर के चिन्मय संत सदन में किया गया। जिसमें समाज के अनेक श्रावक-श्राविकाओं ने श्रद्धा और उत्साह के साथ भाग लिया।

भक्तामर स्तोत्र के दिव्य पाठ से वातावरण धर्ममय हो गया। इस अवसर पर समाज के महावीर मंदिर के अध्यक्ष लालचंद पहाडिया, नागौरी मंदिर के विमल, विनोद झांझरी, अजित पहाडिया, अजमेरी मंदिर के अशोक गंगवाल, राजकुमार सेठी, मनोज पांडया, श्री जैन वीर मंडल के सौभागमल गंगवाल, देवेंद्र पहाडिया, अशोक झांझरी, सुरेश, सुभाष, अशोक, अभिषेक, सुनील जैन और समाज के वरिष्ठजनों और युवाओं, महिलाओं की भागीदारी विशेष रूप से उल्लेखनीय रही। इस प्रकार के धार्मिक आयोजनों से संसार में आध्यात्मिक ऊर्जा का संचार होता है और युवा वर्ग को भी जैन धर्म का मुख्य सिद्धांत जिओ और जीने दो की महान परंपराओं से जुड़ने की प्रेरणा मिलती है।

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