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आचार्यश्री विनम्रसागर जी का 63वां अवतरण दिवस मनाया : दिगंबर समाजजनों की मौजूदगी में एक दिन में ही तीन उत्सव एक साथ हुए


शहर के विजयनगर स्थित पंचबालयति मंदिर में दिगंबर जैन समाज की ओर से तीन उत्सव एक साथ मनाए गए। पहले आचार्यश्री विनम्रसागर जी महाराज का 63वां अवतरण दिवस मनाया गया। इसमें प्रदेशभर के समाजजन शामिल हुए। मुनिश्री विनुतसागर जी महाराज और आर्यिका विमुदश्री माताजी का दीक्षा दिवस भी मनाया गया। इंदौर से पढ़िए, यह खबर…साभार। 


इंदौर। शहर के विजयनगर स्थित पंचबालयति मंदिर में दिगंबर जैन समाज की ओर से तीन उत्सव एक साथ मनाए गए। पहले आचार्यश्री विनम्रसागर जी महाराज का 63वां अवतरण दिवस मनाया गया। इसमें प्रदेशभर के समाजजन शामिल हुए। मुनिश्री विनुतसागर जी महाराज और आर्यिका विमुदश्री माताजी का दीक्षा दिवस भी मनाया गया। इस अवसर पर आयोजित प्रवचन में आचार्यश्री विनम्रसागर जी महराज ने कहा कि प्रत्येक मनुष्य को मोक्ष मार्ग की ओर अग्रसर होना चाहिए। आत्मज्ञान और आत्म साक्षात्कार का मार्ग जीवन का सर्वोत्तम उद्देश्य है। हर जीव में ईश्वर का अंश है और यही ज्ञान हमें मोक्ष की ओर ले जाता है। चातुर्मास समिति के संयोजक राहुल जैन केसरी ने बताया कि अवतरण दिवस महोत्सव में सुबह पूजन, विधान हुआ। आचार्य श्री के जीवन वृत का वाचन कर 63 वर्षों की तपस्या यात्रा प्रस्तुत की गई। सुबह कार्यक्रम की शुरूआत गुरुदेव के आशीर्वाद में प्रक्षालन, चित्र अनावरण से की गई। इस मौके पर समिति के अध्यक्ष धर्मेंद्र जैन, सुरेश भैया, जिनेश भैया, हर्ष जैन, डीके जैन, अक्षय कासलीवाल, आकाश कोयला आदि मौजूद रहे। विजयनगर महिला मंडल, पंचबालयति महिला मंडल, सुखलिया महिला मंडल, स्कीम 78 महिला मंडल, महालक्ष्मीनगर महिला मंडल, तिलकनगर महिला मंडल आदि की महिलाएं भी उपस्थित थीं। कार्यक्रम के दौरान राजीव निराला, प्रदीप जैन शास्त्री आदि ने आचार्यश्री को शास्त्र भेंट किए। मुनिश्री विनुतसागर जी महाराज और आर्यिका श्री विमुद श्री माताजी ने भी आचार्यश्री के आशीर्वाद लिया और सत्य और अहिंसा के मार्ग पर चलने का महत्व बताया।

5 अक्टूबर को होगी इंदौर में जिनेश्वरी दीक्षा

विजयनगर स्थित आईडीए ग्राउंड में 5 अक्टूबर को दोपहर एक बजे आचार्यश्री विनम्रसागर जी महाराज के सान्निध्य में जिनेश्वरी दीक्षा होगी। आचार्यश्री ने कहा कि कि यह महोत्सव बहुत खास है। इसमें आप अवश्य देखें कि जब एक जैन संत बनता है तो अपने ही हाथों से बालों को खींचकर त्याग करता है। वस्त्र उतारकर सांसारिक बंधनों से मुक्त हो जाता है और आजीवन तप में लग जाता है।

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