एक दिन का साधु जीवन पुण्यदायक तप के समान है। एक का साधु जीवन व्यतीत कर गृहस्थ श्रावकों को तप साधना से रूबरू होने का अवसर प्रदान करती है गोचरी दया। यह विचार महासती धैर्य प्रभा मसा ने पोरवाल भवन जंगम पुरा में आयोजित एक की गोचरी दया के आयोजन में व्यक्त किए।
इंदौर। एक दिन का साधु जीवन पुण्यदायक तप के समान है। एक का साधु जीवन व्यतीत कर गृहस्थ श्रावकों को तप साधना से रूबरू होने का अवसर प्रदान करती है गोचरी दया। यह विचार महासती धैर्य प्रभा मसा ने पोरवाल भवन जंगम पुरा में आयोजित एक की गोचरी दया के आयोजन में व्यक्त किए।
साधु जीवन को रेखांकित करते हुए उन्होंने बताया कि इसमें संयम, तप, विनय, मर्यादा, सामयिक, प्रतिक्रमण, उपवास, संयमित भोजन, स्वाध्याय, साधना, ध्यान, नवकार महामंत्र, रात्रि भोजन त्याग, धर्म चर्चा, आगम अध्ययन, बिस्तर रहित शयन, सचित- अचित वस्तुओं के त्याग के अलावा भी अनेक क्रियाएं हैं, जिन्हें साधु-साध्वियों को आवश्यक रूप से करना पड़ती है। संघ के अध्यक्ष विनोद जैन, मंत्री कमल जैन और चातुर्मास प्रमुख मोहन जैन ने बताया कि 40 श्रावकों ने गोचरी दया में भाग लेकर जिनशासन की सेवा की है। इस मौके पर लघु नाटिका का मंचन भी किया गया।













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