आगरा के शांतिनाथ दिगम्बर जैन मंदिर, सेक्टर 7 आवास विकास कॉलोनी सिकंदरा में आज से पर्युषण महापर्व का शुभारम्भ हुआ। दशलक्षण महापर्व के प्रथम दिन ‘उत्तम क्षमा धर्म’ का उत्सव मनाया गया। अंशुल शास्त्री जी ने कहा कि क्षमा कमजोरी नहीं बल्कि आत्मविजय का प्रतीक है। पढ़िए राहुल जैन की ख़ास रिपोर्ट…
आज आगरा के शांतिनाथ दिगम्बर जैन मंदिर, सेक्टर 7 आवास विकास कालोनी सिकंदरा में पर्युषण महापर्व का शुभारम्भ हुआ। इस अवसर पर दशलक्षण पर्व का पहला दिन ‘उत्तम क्षमा धर्म’ के रूप में मनाया गया। सर्वप्रथम भगवान शांतिनाथ का अभिषेक चार महानुभावों द्वारा स्वर्ण कलश से किया गया। इसके अतिरिक्त पांडुक शिला पर विराजमान भगवानों का लगभग सौ इंद्रौ ने अभिषेक करने का सौभाग्य पाया। विधि-विधान की सभी क्रियाएं श्रमण ज्ञान भारती, मथुरा से पधारे विद्वान श्री अंशुल शास्त्री जी एवं अन्य आचार्यों द्वारा सम्पन्न कराई गईं।
आत्म विजेता ही वास्तविक क्षमा का पालन कर सकता
धर्मसभा में अंशुल शास्त्री जी ने क्षमा धर्म की व्याख्या करते हुए कहा कि क्षमा कायरता नहीं बल्कि महानता का प्रतीक है। क्रोध और अहंकार से ग्रस्त व्यक्ति कभी क्षमाभाव धारण नहीं कर सकता, जबकि आत्म विजेता ही वास्तविक क्षमा का पालन कर सकता है। उन्होंने शिशुपाल, ईसा मसीह, प्रभु राम, भगवान महावीर स्वामी और स्वामी दयानंद के जीवन से उदाहरण देते हुए क्षमा की महत्ता को स्पष्ट किया।
यह रहे उपस्थित
समिति अध्यक्ष राजेश बैनाड़ा, मंत्री विजय जैन निमोरब और अन्य गणमान्य सदस्य—मगन कुमार जैन, महेश चंद्र जैन, अरुण जैन, अनिल आदर्श जैन, सतीश जैन, हेम जैन, राकेश जैन, राजेंद्र जैन, मोहित जैन, प्रशांत जैन, विपुल जैन, सिद्धार्थ जैन, अनन्त जैन और विपिन जैन ने भी इस अवसर पर भाग लिया। 29 अगस्त 2025 को सुबह 7:30 बजे से उत्तम मार्दव धर्म की पूजा एवं अभिषेक के साथ-साथ सांस्कृतिक कार्यक्रम भी आयोजित किए जाएंगे।













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