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दिगंबरत्व वासना का नहीं उपासना का प्रतीक: आचार्य निर्भय सागर जी ने स्पष्ट किया दिगंबरत्व का सार


आचार्यश्री निर्भयसागर जी ललितपुर में अपने प्रवचनों से धर्म देशना दे रहे हैं। उन्होंने बुधवार को दिगंबरत्व को सिलसिलेवार समझाया। उन्होंने कहा कि हमारा देश सहिष्णुता और सर्वधर्म समभाव का धर्म है। ललितपुर से पढ़िए, यह खबर…


ललितपुर। आचार्यश्री निर्भयसागर जी ललितपुर में अपने प्रवचनों से धर्म देशना दे रहे हैं। उन्होंने बुधवार को दिगंबरत्व को सिलसिलेवार समझाया। उन्होंने कहा कि हमारा देश सहिष्णुता और सर्वधर्म समभाव का धर्म है। दिगंबरत्व हमारी संस्कृति है और विश्वव्यापी धर्म है। दिगंबरत्व हमारा जन्म सिद्ध अधिकार है क्योंकि, दिगम्बरत्व वासना का नहीं उपासना का प्रतीक है, दिगंबरत्व प्रदर्शन का नहीं आत्मदर्शन का प्रतीक है, दिगंबरत्व आत्म साधना के लिए है, साधनों के लिए नहीं।

विषय वासना के कारण पर्दे में रहने का है फरमान 

आचार्य श्री ने कहा दिगंबरत्व से मुक्ति है। ब्रह्मा के अंश बनकर नंगे ही जन्मे हैं, लेकिन विषय वासना आने के कारण पर्दे में रहने का भी फरमान है। जैन मुनि का दिगंबर निश्चल, निष्कपट और विषय वासना से रहित होने का द्योतक है। परमात्मा की प्राप्ति उसे ही होती है जो निश्चल, निष्कपट और वासना से रहित होता है। संत वही है जिसने अपने संसार का अंत कर लिया है।

सत्तोदय तीर्थ क्षेत्र अध्यक्ष ने श्रीफल भेंट किया 

आचार्यश्री ने कहा कि जो सच्चा ज्ञान सच्ची आस्था सच्चा आचरण से युक्त होता है। सच्चे साधु की सेवा करने से मनोवांछित फल की प्राप्ति होती है। धर्म सभा के प्रारंभ में सत्तोदय तीर्थ अतिशय क्षेत्र सीरोन अध्यक्ष सतीश जैन बजाज, आनंद जैन, मनोज जैन, मुकेश जैन, संजय जैन मोदी, विजय जैन लागोंन, नगर पालिका पार्षद आलोक जैन मयूर ने आचार्यश्री को श्रीफल अर्पित कर पाद् प्रक्षालन एवं शास्त्र भेंट किया। जिन्हें दिगंबर जैन पंचायत के अध्यक्ष डॉ. अक्षय टडया, महामंत्री आकाश जैन कैप्टन राजकुमार जैन, सनत खजुरिया,अमित जैन सराफ,आदि ने सम्मानित किया।

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