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भगवान नेमिनाथ निर्वाण महोत्सव भक्ति भाव से मनाया: अभिषेक, शांतिधारा और निर्वाण लाडू चढ़ाने का किया पुण्यार्जन


श्री दिगंबर जैन समाज के नेतृत्व में श्री दिगंबर जैन मंदिर में 22 वें तीर्थंकर श्री नेमिनाथ भगवान का निर्वाण महोत्सव भक्ति भाव से मनाया गया। बुधवार को आचार्य श्री विवेक सागर जी के मंगल आशीर्वाद से नेमिनाथ भगवान की बड़ी प्रतिमा पर अभिषेक किया गया। भक्तों ने भगवान के समक्ष निर्वाण लाडू चढ़ाया। झुमरी तलैया से पढ़िए, जैन राज अजमेरा और नवीन जैन की यह खबर…


झुमरीतलैया। श्री दिगंबर जैन समाज के नेतृत्व में श्री दिगंबर जैन मंदिर में 22 वें तीर्थंकर श्री नेमिनाथ भगवान का निर्वाण महोत्सव भक्ति भाव से मनाया गया। नेमिनाथ भगवान का निर्वाण गुजरात जूनागढ़ के गिरनार पर्वत से कई हजार वर्ष पूर्व आषाढ़ सुदी सप्तमी के दिन हुआ था, तब से जैन समाज के लोग पूरे विश्व में पूरी भक्ति भाव से भगवान का निर्वाण महोत्सव मनाते हैं और साथ ही गिरनार पर्वत पर 10 हज़ार सीढ़ी चढ़कर हज़ारों भक्त निर्वाण लड्डू चढ़ाने पहुंचे हैं। बुधवार को प्रातः आचार्य श्री विवेक सागर जी के मंगल आशीर्वाद से नेमिनाथ भगवान की बड़ी प्रतिमा पर अभिषेक किया गया। प्रथम अभिषेक पवन जैन खड़कपुर और शांतिधारा महावीर प्रसाद इंदु जैन सेठी परिवार ने किया। सुरेंद्र शैलेश जैन छाबड़ा परिवार को भगवान की शांतिधारा आचार्य मुख से विशेष मंत्रोच्चार के साथ सौभाग्य मिला। सुबोध आशा जैन गंगवाल के संगीतमय पूजन के साथ भगवान का निर्वाण लाडू चढ़ाने का सौभाग्य सुरेंद्र सरिता जैन काला, ललित-नीलम जैन सेठी, सुबोध आशा जैन गंगवाल, शशि रीता जैन सेठी, सुमित निशु जैन सेठी के परिवार को मिला। दूसरा कमल कुसुम जैन गंगवाल और नया मंदिर में प्रदीप-प्रेम जैन पांड्या को सौभाग्य प्राप्त हुआ।

आचार्यश्री ने बताया भगवान नेमिनाथ तीर्थ का महत्व 

समाज के लोगों ने सभी कार्यक्रम में सहभागी बने। इस अवसर पर विशेष रूप से जैन समाज के उप मंत्री राज जैन छाबड़ा, कोषाध्यक्ष सुरेंद्र जैन काला, सुनील जैन सेठी, महिला संगठन की अध्यक्ष नीलम जैन, मंत्राणी आशा जैन गंगवाल शामिल हुए। इस अवसर पर आचार्य श्री ने कहा कि आज के दिन गिरनार पर्वत से जैन धर्म के 22 वंे तीर्थंकर नेमिनाथ भगवान का निर्वाण हुआ था। वहां आज भी जैन तीर्थंकर नेमिनाथ भगवान के चरण स्थापित हैं। जिनके दर्शन कर लोग अपने जीवन को धन्य मान रहे हैं और पुण्य अर्जित कर रहे हैं। उन्होंने कहा कि अपने जीवन में गिरनार की यात्रा क्यों की? हम सभी निर्वाण कल्याणक तीर्थंकर भगवान का मनाते हैं। इस अवसर पर समाज के सभी वर्ग शामिल हुए।

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