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आचार्यश्री सुंदर सागर जी ने पारस जैन को अपने आशीष से किया उपकृत: तलवंडी कोटा में विराजित हैं आचार्य श्री 


औद्योगिक नगरी कोटा के तलवंडी स्थित श्री दिगंबर जैन मंदिर में आचार्य श्री सुंदरसागर जी (14 पिच्छिका) ससंघ ने विगत 35 सालों से पत्रकारिता के क्षेत्र में उल्लेखनीय योगदान देने वाले राष्ट्रीय मीडिया प्रभारी पारस जैन ‘पार्श्वमणि’ को प्रसन्न चित्र मुद्रा, धर्म प्रभावना के लिए मंगल आशीर्वाद प्रदान किया। इस अवसर पर बूंदी का गोठड़ा दिगंबर जैन समाज के पदाधिकारी एवं युवा मंडल के सदस्य भी उपस्थित थे। कोटा से पढ़िए, विमल कमलेश जैन की यह खबर…


कोटा। औद्योगिक नगरी कोटा के तलवंडी स्थित श्री दिगंबर जैन मंदिर में आचार्य श्री सुंदरसागर जी (14 पिच्छिका) ससंघ ने विगत 35 सालों से पत्रकारिता के क्षेत्र में उल्लेखनीय योगदान देने वाले राष्ट्रीय मीडिया प्रभारी पारस जैन ‘पार्श्वमणि’ को प्रसन्न चित्र मुद्रा, धर्म प्रभावना के लिए मंगल आशीर्वाद प्रदान किया। इस अवसर पर बूंदी का गोठड़ा दिगंबर जैन समाज के पदाधिकारी एवं युवा मंडल के सदस्य भी उपस्थित थे। विदित है कि पारस जैन ‘पार्श्वमणि’ ने संपूर्ण भारत वर्ष की शिक्षण संस्थानों में ‘मेरी भावना’ को पढ़ाया जाए, शिक्षण संस्थानों में लागू किया जाए का मिशन चलाया हुआ है। मध्यप्रदेश सरकार ने कक्षा 7 हिंदी में प्रथम नंबर पर ‘मेरी भावना’ को रखकर पढ़ाना शुरू कर दिया है। पूर्ववर्ती मध्यप्रदेश सरकार की ओर से कुपोषण के शिकार मासूम बच्चों को अंडा देने जा रही थी, उसका भी अपनी प्रबल लेखनी से घोर विरोध किया था। अंत में वह प्रस्ताव पास नहीं हो पाया। पार्श्वमणी पत्रकार के पास विगत 35 वर्षों के अलग-अलग धार्मिक अनुष्ठानों, पंचकल्याण को आयोजनों की विशेष कवरेज फाइल भी उपलब्ध है।

आप जब अपनी सुरीली आवाज में भावपूर्ण प्रस्तुति भजनों की देते हैं तो श्रद्धालु भाव विभोर हो झूम लग जाते हैं। पार्श्वमणि का व्यक्तित्व चुंबकीय है एक बार जो इनके संपर्क में आ जाता है, इनका ही होकर रह जाता है। आपका जन्म पिता देव शास्त्र गुरु के भक्त स्वर्गीय विमलचंद जैन एवम धर्मनिष्ठ स्वर्गीय शांति देवी के घर आंगन में हुआ। आपकी दो सुयोग्य पुत्री खुशबू जैन, गतिमा जैन अध्ययनरत हैं। आपकी एक बहन विवाहित ममता जैन राजेंद्र जैन (अटरू वाले) कोटा में रहते हैं।

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