अतिशय क्षेत्र अडिंदा पार्श्वनाथ में गणिनी आर्यिका श्री भरतेश्वरमति माताजी के पावन सानिध्य में श्रुत पंचमी पर्व श्रद्धा और उल्लास के साथ मनाया गया। इस अवसर पर श्रुत स्कंध विधान की भक्ति पूर्ण आराधना संपन्न हुई। पढ़िए यह विशेष रिपोर्ट…
उदयपुर। अतिशय क्षेत्र अडिंदा पार्श्वनाथ में गणिनी आर्यिका श्री भरतेश्वरमति माताजी के पावन सानिध्य में श्रुत पंचमी पर्व श्रद्धा और उल्लास के साथ मनाया गया। इस अवसर पर पंडित सुनील जैन के निर्देशन में श्रुत स्कंध विधान की भक्ति पूर्ण आराधना संपन्न हुई। कार्यक्रम की शुरुआत अनुकंपा दीदी के मंगलाचरण से हुई।
धर्मसभा में आर्यिका माताजी ने श्रद्धालुओं को संबोधित करते हुए कहा:
“भगवान महावीर की दिव्य देशना के पश्चात तीर्थंकरों की वाणी को लिपिबद्ध करने हेतु आचार्य धरसेन जी के निर्देश पर आचार्य भूतबली और आचार्य पुष्पदंत ने षट्खंडागम की रचना की। इसी ऐतिहासिक घटना की स्मृति में ज्येष्ठ शुक्ल पंचमी को ‘श्रुत पंचमी’ के रूप में मनाया जाता है।”
उन्होंने आगे कहा कि श्रुत पंचमी ज्ञान की आराधना का पर्व है, जिसमें मां जिनवाणी की विशेष पूजा-अर्चना की जाती है। साथ ही चातुर्मास के महत्व पर प्रकाश डालते हुए बताया कि संत चार मास एक ही स्थान पर रहकर आत्मकल्याण के साथ-साथ जनकल्याण हेतु धर्म प्रभावना करते हैं।
कार्यक्रम में पंडित डॉ. राकेश जैन ने चातुर्मास और श्रुत पंचमी के ऐतिहासिक व आध्यात्मिक पहलुओं पर सारगर्भित वक्तव्य प्रस्तुत किया।
धार्मिक क्रियाएं और विनतियां
धर्मसभा के दौरान आर्यिका माताजी का पाद प्रक्षालन रमिला देवी (पत्नी अजबलाल जैन) द्वारा किया गया। जिनवाणी भेंट का सौभाग्य श्रीपाल बोहरा परिवार को प्राप्त हुआ। इस अवसर पर अडिंदा ट्रस्ट परिवार, लोहारिया, जगत एवं गिंगला जैन समाज के श्रद्धालुओं ने वर्ष 2025 के चातुर्मास हेतु श्रीफल भेंट कर विनती की।
चातुर्मास घोषणा
आर्यिका श्री ने सभी समाजों की भावनाओं का सम्मान करते हुए कहा कि “निवेदन तो अनेक समाजों की ओर से हुआ, किंतु चातुर्मास तो एक ही स्थान पर हो सकता है। लोहारिया जैन समाज की प्रबल भक्ति और समाधिस्थ आचार्य श्री भरत सागर जी महाराज के अधूरे कार्यों को पूर्ण करने के उद्देश्य से वर्ष 2025 का चातुर्मास लोहारिया में करने का निर्णय लिया गया है।”
विशेष उपस्थिति
इस पावन अवसर पर कमल सागोटिया, प्रवीण राज संगावत, अजीत मानावत, शांतिलाल भदावत, भगवतीलाल टाया, अशोक कोठारी, शांतिलाल डालिया, गोकुलचंद मालवी, लोहारिया जैन समाज अध्यक्ष राजमल नायक, अशोक नश्नावत, जसराज डाबी, कनकमल जैन सहित जगत, गिंगला व लोहारिया जैन समाज के सैकड़ों श्रावक-श्राविकाएं उपस्थित रहे।













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