पुष्य नक्षत्र के पावन अवसर पर परम पूज्य आचार्य श्री विद्यासागर जी महाराज एवं अभिनव आचार्य श्री 108 समय सागर जी महाराज के मंगल आशीर्वाद से भुलेश्वर स्थित श्री 1008 चंद्रप्रभ दिगंबर जैन मंदिर एवं मेडिकल सेंटर में नि:शुल्क स्वर्ण प्राशन शिविर का सफल आयोजन किया गया। यह शिविर प्राचीन भारतीय संस्कार प्रणाली में वर्णित स्वर्ण प्राशन संस्कार पर आधारित था। पढ़िए यह अजय जैन की विशेष रिपोर्ट..
भुलेश्वर (मुंबई) | पुष्य नक्षत्र के पावन अवसर पर परम पूज्य आचार्य श्री विद्यासागर जी महाराज एवं अभिनव आचार्य श्री 108 समय सागर जी महाराज के मंगल आशीर्वाद से भुलेश्वर स्थित श्री 1008 चंद्रप्रभ दिगंबर जैन मंदिर एवं मेडिकल सेंटर में नि:शुल्क स्वर्ण प्राशन शिविर का सफल आयोजन किया गया। यह शिविर प्राचीन भारतीय संस्कार प्रणाली में वर्णित स्वर्ण प्राशन संस्कार पर आधारित था, जो बच्चों के शारीरिक, मानसिक और बौद्धिक विकास के लिए अत्यंत लाभकारी माना गया है। इसमें स्वर्ण भस्म, गिर गौघृत, ब्राह्मी, शंखपुष्पी आदि औषधियों का विशेष मिश्रण दिया गया, जिसे आयुर्वेद में ‘बुद्धिवर्धक एवं रोगप्रतिरोधक’ अमृत के रूप में जाना जाता है।
रोग प्रतिरोधक क्षमता को बढ़ाता है
शिविर में कुल 34 बच्चों को स्वर्ण प्राशन कराया गया। यह औषधीय योग शांतिधारा गिर गौशाला, बीना जी बारहा के पंचगव्य अनुसंधान केंद्र द्वारा निर्मित था। यह 0 से 16 वर्ष तक की आयु के बच्चों के लिए उपयुक्त होता है, जो न केवल रोग प्रतिरोधक क्षमता को बढ़ाता है बल्कि मौसमी रोगों से भी सुरक्षा प्रदान करता है। साथ ही यह पोषण की कमी को दूर करने में भी सहायक होता है। इस सेवा कार्य में आदिनेश अहिंसक व्यापार एवं सकल दिगंबर जैन समाज, भुलेश्वर मुंबई का विशेष सहयोग रहा। शांतिधारा संस्था के संयुक्त प्रयास से यह 361वां नि:शुल्क स्वर्ण प्राशन शिविर सफलता के साथ संपन्न हुआ। समाजजनों ने इस सेवा अभियान की भूरि-भूरि सराहना करते हुए इसे स्वास्थ्य जागरूकता के साथ-साथ संस्कारों की पुनःस्थापना का एक प्रेरणादायक प्रयास बताया।













Add Comment