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मुनि सुयश सागर जी का मिला मंगल आशीर्वाद : सिद्ध चक्र महामंडल विधान में नव निर्मित द्वार का हुआ लोकार्पण 


जीवन को सफल बनाने के लिए जिनका दर्शन अत्यंत महत्वपूर्ण है, ऐसे परमपूज्य जैन संत मुनि श्री 108 सुयश सागर जी मुनिराज जी के मंगल आशीर्वाद से 1008 सिद्धचक्र महामंडल विधान और विश्व शांति महायज्ञ का आज अंतिम दिन मनाया गया। इस अवसर पर 1008 आदिनाथ भगवान का अभिषेक सभी इंद्रगण के साथ सैकड़ों श्रद्धालुओं ने किया। पढ़िए राजकुमार अजमेरा और नवीन जैन की रिपोर्ट…


झुमरीतिलैया। जीवन को सफल बनाने के लिए जिनका दर्शन अत्यंत महत्वपूर्ण है, ऐसे परमपूज्य जैन संत मुनि श्री 108 सुयश सागर जी मुनिराज जी के मंगल आशीर्वाद से 1008 सिद्धचक्र महामंडल विधान और विश्व शांति महायज्ञ का आज अंतिम दिन मनाया गया। इस अवसर पर 1008 आदिनाथ भगवान का अभिषेक सभी इंद्रगण के साथ सैकड़ों श्रद्धालुओं ने किया। शांतिधारा राकेश-प्रीति छाबड़ा द्वारा की गई। इसके बाद पंडित अभिषेक शास्त्री द्वारा सभी आरंभिक क्रियाओं के साथ विधान की शुरुआत हुई, जिसमें आज 1024 अर्धकुमार और श्रीफल प्रभु के चरणों में सोधर्म इंद्र सहित सभी इंद्रों ने मंडप पर चढ़ाया। इस विशेष अवसर पर पूज्य मुनि श्री ने अपने मंगल उद्बोधन में कहा कि सिद्धचक्र महामंडल विधान अरबपति या पैसे वाले नहीं कर पाते हैं, यह कार्य उन लोगों द्वारा किया जाता है जो मन के धनी होते हैं, जिनकी किस्मत और पुण्य बलवान होते हैं। ऐसे लोग ही साक्षात भगवान के दरबार में इस विधान को संपन्न कर पाते हैं। यह कोडरमा समाज का पुण्य का उदय है कि धर्म नगरी में अनंत सिद्ध परमेष्ठि की आराधना की गई। महाराज श्री ने कहा, “जो पाप कर्म तप और त्याग से नहीं कट सकते, वे पाप कर्म सिद्धचक्र विधान करने से कट जाते हैं।” इस अवसर पर अठाई में आठ दिन तक उपवास करने वाली नीलम सेठी को समाज की ओर से अनुमोदना दी गई और मुनि श्री का आशीर्वाद प्राप्त हुआ।

 

उत्तरमुख कुबेर का 

पूजन के बाद मुनि श्री गाजे-बाजे के साथ नए जैन मंदिर, पानी टंकी रोड पहुंचे, जहां नए मंदिर के द्वार का उद्घाटन पुण्याजक परिवार प्रदीप और मीरा छाबड़ा ने मुनि श्री के स्वागत के साथ किया और उनके चरण धोने का सौभाग्य प्राप्त किया। इसके बाद पंडित जी ने पूजन और मंत्रोच्चारण करके मुनि श्री के मंगल आशीर्वाद से उत्तरमुख द्वार का उद्घाटन किया। इस अवसर पर समाज के सभी पदाधिकारियों ने पुण्यार्जक परिवार प्रदीप और मीरा छाबड़ा, पीयूष-प्रियंका, राहुल-आरची छाबड़ा, हजारीबाग से आए सुबोध-मनोरमा, सरिया से आए राजेश सेठी आदि को तिलक, माला और साफा पहनाकर स्वागत किया। इस शुभ अवसर पर जैन मुनि ने कहा, “उत्तरमुख कुबेर का होता है, जो पूरे समाज और शहर के लिए शुभ है। प्रदीप छाबड़ा परिवार को मेरा आशीर्वाद है।” पुण्यार्जक परिवार प्रदीप छाबड़ा ने कहा, “उत्तरमुखी दरवाजे बनाने की मेरी इच्छा बहुत दिनों से थी, जो आज पूज्य गुरुदेव की कृपा से पूरी हुई। गुरुदेव का आशीर्वाद मेरे परिवार पर हमेशा बना रहे।”

शाम को हुई आरती

संध्याकाल में भव्य आरती ललित-आशीष सेठी टैलेंट ग्रुप और अर्हम ग्रुप के द्वारा की गई। इसके साथ ही सुबोध गंगवाल, नवादा से आए विजय जैन, जियागंज से आए शुशील जैन ने अपने भजनों से सभी को भक्ति में लीन कर दिया। अंत में गुरु मुख से णमोकार चालीसा का पाठ हुआ। इस विधान में विशेष रूप से अनेक श्रद्धालु भक्तों ने भाग लिया।

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