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हमारे जीवन में मृदुता का बहुत ही महत्व : दसलक्षण पर्व के दूसरे दिन की गई उत्तम मार्दव धर्म की पूजा 


 श्री दिगंबर जैन अतिशय क्षेत्र श्री पार्श्व पद्मावती धाम पलवल में आज दिव्य तपस्वी, वात्सल्य सम्राट,राष्ट्र संत,पलवल तीर्थ उपसर्ग निवारक आचार्य श्री सुंदरसागर जी के आशीर्वाद से भूगर्भ से अवतरित आदि ब्रह्मा श्री आदिनाथ भगवान का पंचामृत अभिषेक और शंतिधारा की गई और उत्तम मार्दव धर्म की पूजा की गई। पढ़िए यह विशेष रिपोर्ट…


पलवल। श्री दिगंबर जैन अतिशय क्षेत्र श्री पार्श्व पद्मावती धाम पलवल में आज दिव्य तपस्वी, वात्सल्य सम्राट,राष्ट्र संत,पलवल तीर्थ उपसर्ग निवारक आचार्य श्री सुंदरसागर जी के आशीर्वाद से भूगर्भ से अवतरित आदि ब्रह्मा श्री आदिनाथ भगवान का पंचामृत अभिषेक और शंतिधारा की गई और उत्तम मार्दव धर्म की पूजा की गई। इस अवसर पर श्री पार्श्व पद्मावती धाम के अध्यक्ष विनोद जैन ने उत्तम मार्दव धर्म के विषय में प्रकाश डालते हुए बताया कि व्यवहार में विनम्रता लाता है उत्तम मार्दव धर्म। उत्तम क्षमा धर्म के बाद, पर्युषण के दूसरे दिन उत्तम मार्दव धर्म पर धार्मिक कार्यक्रम का आयोजन हुआ।

इस अवसर पर तीर्थ कमेटी के ट्रस्टी शीतल जैन ने कहा कि हमारे जीवन में मृदुता का बहुत ही महत्व है, पर हम सभी जाति, कुल, रूप, ज्ञान, तप, वैभव, प्रभुत्व और ऐश्वर्या आदि आठ प्रकार के मद, घमंड करके अकड़ते हैं। मैं ऊंची जाति का हूं, मैं ऊंचे कुल का हूं, मेरा रूप अति सुंदर है, मैं वैभवशाली हूं आदि सोच कर अकड़ते हैं। पर अकड़ करने वाले की गति खराब होती है। जिस प्रकार आंधी आने पर बड़े-बड़े पेड़ उखड़ जाते हैं। पर बांस का पेड़ जो आंधी आने पर झुक जाता है, उस पर आंधी का कोई असर नहीं होता, फिर से खड़ा हो जाता है।

इसी प्रकार हम जीवन में नम्र बने, झुकना सीखेंगे, तो बड़ी से बड़ी बाधाएं कुछ नहीं बिगाड़ सकती। मार्दव धर्म हमें नम्र बनाती है। इस अवसर पर विनोद जैन, शीतल जैन, अनुज जैन, मेघा जैन, नितिन जैन, अमन जैन और अरिहंत जैन आदि उपस्थित रहे

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