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सहा नहीं गया गुरु का वियोग, रो पड़ा शिष्यों का हृदय : श्रमण संस्कृति में गुरुवर विरागसागर जी की आदर्श समाधि -आचार्य विमर्शसागर 


देशभर में विराजमान महा संत के 500 शिष्याओं ने अपने गुरुदेव के चरणों में विनयांजलि द्वारा अपने भाव सुमन अर्पित किए गर्णाचार्य श्री के सुयोग शिष्यों में भावलिंगी संत आचार्य श्री विमर्श सागर जी महामुनिराज ” जीवन है पानी की बूंद” महाकाव्य के मूल रचिता के रूप में विख्यात हैं पढ़िए मनोज जैन नायक की रिपोर्ट…


दिल्ली। सहा नहीं गया गुरु का वियोग रो पड़ा शिष्यों का हृदय ,आंखें हो गई सजल, छलक पड़ी आंखों से अश्व धारा जब विशाल चतुर्विध संघ महानायक 500 से 530 पिच्छी धारी साधु संतों के महागुरु परम पूज्य शुद्धउपयोगी संत श्री गर्णाचार्य सुरिगच्छचार्य गुरुदेव श्री 108 विराग सागर जी महामुनिराज का संल्लेखना समाधि मरण का समाचार सुना। महाराष्ट्र प्रांत के जालना नगर में रात्रि 2:30 पर पूर्णता जागृत एवं सचेत अवस्था में मुनि वृंदों के मध्य महामंत्र णमोकार का स्मरण करते-करते इस युग के महासंघ गर्णाचार्य विराग सागर जी महामुनिराज का देवलोक गमन हुआ। रात्रि में ही यह समाचार संपूर्ण भारतवर्ष हवा की तरह प्रसारित हो गया। प्रात काल का सूर्योदय होते-होते लाखों की संख्या में श्रद्धालु, भक्तगण अंतिम गुरु दर्शन के लिए पहुंचने लगे थे।

4 जुलाई की मध्यान्ह वेला में संपूर्ण जैन विधि विधान के अनुसार महा संत के पार्थिव शरीर को मुखाग्नि दी गई। देशभर में विराजमान महा संत के 500 शिष्याओं ने अपने गुरुदेव के चरणों में विनयांजलि द्वारा अपने भाव सुमन अर्पित किए गर्णाचार्य श्री के सुयोग शिष्यों में भावलिंगी संत आचार्य श्री विमर्श सागर जी महामुनिराज ” जीवन है पानी की बूंद” महाकाव्य के मूल रचिता के रूप में विख्यात है।

विहार के दौरान जब आचार्य श्री को अपने गुरुदेव के वियोग का समाचार ज्ञात हुआ, तब आचार्य श्री के संपूर्ण संघ की आंखें नम हो गईं। तत्काल आचार्य श्री ने अपनी संघस्थ शिष्य बाल ब्रह्मचारिणी विशू दीदी सहित सभी त्यागी व्रतियों को अपने गुरुदेव के अंतिम दर्शन के लिए प्रस्थान करवा दिया।

अर्पित किए भाव सुमन

4 जुलाई की प्रातः बेला में आचार्य श्री ससंघ पश्चिमी दिल्ली नफजगड़ में स्थित जैन तीर्थ भरत क्षेत्रम पहुंचे वहां विशाल विनयांजलि सभा में आचार्य श्री विमर्श सागर जी महामुनिराज ने अपने गुरुवर महासंघ गर्णाचार्य श्री विराग सागर जी महामुनिराज के चरणों में भाव श्रद्धा सुमन समर्पित करते हुए कहा कि हमारे गुरुवर एक दूरदर्शी विचारधारा धारण करने वाले महान आचार्य थे गुरुदेव ने अपने साधना काल के प्रत्येक कार्य सोच समझकर एवं आगम आज्ञा पूर्वक संपादित किए हैं। आज जो यह समाचार प्राप्त हुआ है। इस भवितव्यता से भी गुरुदेव पूर्व से ही परिचित थे इसी कारण उन्होंने समय से पूर्वी अपने पद व जिम्मेदारियां को त्याग दिया था वह पूर्णता हल्के होकर उध्वरलोक में गए हैं अतः निश्चित थी उपरिम स्वर्ग में गुरुदेव ने जन्म प्राप्त किया होगा मुझे याद आ रही है वे वात्सल्य भरे छण जो मैंने गुरुदेव के चरणों में उनकी गोद में सिर रखकर बिताए थे गुरुदेव हमारे बीच नहीं रहे लेकिन वह हमारे साथ और हरदम हमारे पास में रहेंगे। जन समुदाय के बीच नफजगढ़ जैन समाज के आग्रह पर आचार्य श्री विमर्श सागर जी ने कहा 4 जुलाई आचार्य श्री विराग सागर जी महाराज का समाधि दिवस “अहिंसा शाकाहार दिवस” के रूप में मनाया जाए यही मेरा मंगल आशीर्वाद है।

विशाल विनयांजलि सभा सात को

7 जुलाई को पश्चिमी दिल्ली संभाग के 29 जैन मंदिरों के समस्त पदाधिकारी गणों के आग्रह पर आचार्य श्री विमर्श सागर जी ससंघ सानिध्य में सेक्टर 10 के सभा मंडप में गर्णाचार्य श्री विराग सागर जी महामुनिराज के सर्वोत्तम समाधि मरण के अवसर पर विशाल विन्यांजलि सभा आयोजित की जा रही है 7 जुलाई की प्रातः वेला में जिन मंदिर का शिलान्यास तथा उसी दिन संध्या बेला में विशाल विन्यांजलि सभा में हजारों की संख्या में श्रद्धालु गण आचार्य श्री के चरणों में अपने भाव, श्रद्धा सुमन अर्पित करेंगे। इस अवसर पर उपाध्यक्ष श्री विशोक सागर जी महामुनिराज भी मौजूद रहेंगे।

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