भारत के हृदय स्थल मध्यप्रदेश के छतरपुर जिले अंतर्गत, जिले से 57 किमी दूर राष्ट्रीय राजमार्ग 86 बड़ामलहरा कस्बा के 7 किमी निकट ,कलकल बहती दो नदियों के मध्य प्राकृतिक सौंदर्यता से भरपूर विशाल गगनचुम्बी जिन मन्दिरों से युक्त सर्व सुविधाओं से सम्पन्न गुरुदत्तादि साढ़े आठ करोड़ मुनिराजों की निर्वाण स्थली लघु सम्मेद शिखर नाम से विख्यात दिगम्बर जैन तीर्थ ‘द्रोणगिरि’ ऊर्जा के खजाने से भरपूर, देश में अपनी अलग पहिचान रखता है। पढि़ए मनीष शास्त्री विद्यार्थी की पूरी रिपोर्ट
द्रोणगिरि। भारत के हृदय स्थल मध्यप्रदेश के छतरपुर जिले अंतर्गत, जिले से 57 किमी दूर राष्ट्रीय राजमार्ग 86 बड़ामलहरा कस्बा के 7 किमी निकट ,कलकल बहती दो नदियों के मध्य प्राकृतिक सौंदर्यता से भरपूर विशाल गगनचुम्बी जिन मन्दिरों से युक्त सर्व सुविधाओं से सम्पन्न गुरुदत्तादि साढ़े आठ करोड़ मुनिराजों की निर्वाण स्थली लघु सम्मेद शिखर नाम से विख्यात दिगम्बर जैन तीर्थ ‘द्रोणगिरि’ ऊर्जा के खजाने से भरपूर, देश में अपनी अलग पहिचान रखता है। यात्रियों को रुकने के लिए थ्री स्टार लेबेल की वातानुकूलित धर्मशालाएं एवं शुद्ध सात्विक भोजन की पूर्ण व्यवस्था है। आवागमन एवं स्वास्थ्य सुविधाओं से युक्त है। द्रोणगिरि की 100 किमी की परिधि में अनेक तीर्थ स्थल हैं एवं 7 से 10 किमी की दूरी पर सेवा भावी जैन समाज के परिवारों से युक्त बड़े कई कस्बे हैं। द्रोणगिरि में संचालित श्री दि0 जैन गुरुदत्त उदासीन आश्रम भारत में अपनी अलग पहचान रखता है। इस आश्रम में गृहस्थ, एकल एवं पति-पत्नी जोड़ी से एवं त्यागी व्रती, साधु संत रहकर आत्म साधना करते हैं।आश्रम में (365 दिन) प्रति दिन चौका लगता है। वर्तमान में महान तपस्वी, विद्वान मुनि श्री आदिश सागर जी मुनि महाराज विराजमान हैं। उनकी आहारचर्या एवं स्वाध्याय का लाभ भी सभी को मिल रहा है। त्यागी व्रतियों,गृहिस्थजनों की आवास एवं भोजन की सभी व्यवस्था नि:शुल्क है। बच्चों के उच्च शिक्षत होने के कारण बच्चे देश, विदेशों में दूर रह रहे हैं। माता- पिता एकांत जीवन व्यतीत कर रहे हैं। किसी की वृद्ध अवस्था भी है एवं जो श्रावक आत्म साधना करना चाहते हैं उन सभी के लिए उदशीन आश्रम अनूठा स्थान है। गृहस्थ जनों को चाय, दूध, स्वल्पहार, मध्यान्ह अल्पाहार एवं सुबह शाम शुद्ध, सात्विक, पौष्टिक भोजन सुविधा उपलब्ध है। परिवार जैसा वातावरण है, स्वध्याय हेतु बड़ा पुस्तकालय है। आश्रम परिसर में ही अति मनोज्ञ, चमत्कारी सहस्त्र फणी पाश्र्वनाथ भगवान का मंदिर है।
चिकित्सा की सुविधाएं – प्राथमिक उपचार द्रोणगिरि एवं निकट बड़ामलहरा, छतरपुर में सभी सुविधाओं से युक्त हॉस्पिटल हैं। आश्रम के कुएं का जल अमृत तुल्य है, हजार रोगों की दवा तो अकेले यहां के कुएं के जल में है। आयुर्वेदिक औषधालय है। आश्रम के गेट से आवागमन के हर 5 मिनिट में पर्याप्त साधन उपलब्ध हैं। जो साधु संत, त्यागी व्रती, एकल, युगल गृहस्थ अल्प समय या स्थाई रूप से यहां रहकर साधना करना चाहते हों आनन्द का जीवन व्यतीत करना चाहते हों उनका स्वागत है। कमेटी उनकी सेवा के लिए तत्पर है।
परस्परोपग्रहो जीवानाम – जो भी महानुभाव चाहते हैं कि हम अप्रत्यक्ष रूप से भी सेवा करें, तो आप अपनी पूण्य से अर्जित चंचला लक्ष्मी का सदुपयोग आहार दान, औषधि दान, दूध, फल, राशन के रूप में करना चाहते हैं उन सभी दातारों का स्वागत है। भागचन्द जैन पीलीदुकान बड़ामलहरा अधिष्ठाता, संतोष कुमार घड़ी सागर अध्यक्ष प्रबन्ध समिति, महेंद्र कुमार जैन एल आई सी महामंत्री ट्रस्ट, गजेंद्र जैन मंडी बड़ामलहरा मंत्री प्रबन्ध समिति, हरिश्चंद जैन मुंगवारी कोषाध्यक्ष प्रबन्ध समिति, श्री गुरुदत्त दिगम्बर जैन उदासीन आश्रम ट्रस्ट एवं प्रबन्ध समिति द्रोणगिरि जिला छतरपुर। देशों में दूर रह रहे हैं। माता- पिता एकांत जीवन व्यतीत कर रहे हैं। किसी की वृद्ध अवस्था भी है एवं जो श्रावक आत्म साधना करना चाहते हैं उन सभी के लिए उदशीन आश्रम अनूठा स्थान है। गृहस्थ जनों को चाय, दूध, स्वल्पहार, मध्यान्ह अल्पाहार एवं सुबह शाम शुद्ध, सात्विक, पौष्टिक भोजन सुविधा उपलब्ध है। परिवार जैसा वातावरण है, स्वध्याय हेतु बड़ा पुस्तकालय है। आश्रम परिसर में ही अति मनोज्ञ, चमत्कारी सहस्त्र फणी पाश्र्वनाथ भगवान का मंदिर है।
चिकित्सा की सुविधाएं – ंप्राथमिक उपचार द्रोणगिरि एवं निकट बड़ामलहरा, छतरपुर में सभी सुविधाओं से युक्त हॉस्पिटल हैं। आश्रम के कुएं का जल अमृत तुल्य है, हजार रोगों की दवा तो अकेले यहां के कुएं के जल में है। आयुर्वेदिक औषधालय है। आश्रम के गेट से आवागमन के हर 5 मिनिट में पर्याप्त साधन उपलब्ध हैं। जो साधु संत, त्यागी व्रती, एकल, युगल गृहस्थ अल्प समय या स्थाई रूप से यहां रहकर साधना करना चाहते हों आनन्द का जीवन व्यतीत करना चाहते हों उनका स्वागत है। कमेटी उनकी सेवा के लिए तत्पर है।
परस्परोपग्रहो जीवानाम – जो भी महानुभाव चाहते हैं कि हम अप्रत्यक्ष रूप से भी सेवा करें, तो आप अपनी पूण्य से अर्जित चंचला लक्ष्मी का सदुपयोग आहार दान, औषधि दान, दूध, फल, राशन के रूप में करना चाहते हैं उन सभी दातारों का स्वागत है। भागचन्द जैन पीलीदुकान बड़ामलहरा अधिष्ठाता, संतोष कुमार घड़ी सागर अध्यक्ष प्रबन्ध समिति, महेंद्र कुमार जैन एल आई सी महामंत्री ट्रस्ट, गजेंद्र जैन मंडी बड़ामलहरा मंत्री प्रबन्ध समिति, हरिश्चंद जैन मुंगवारी कोषाध्यक्ष प्रबन्ध समिति, श्री गुरुदत्त दिगम्बर जैन उदासीन आश्रम ट्रस्ट एवं प्रबन्ध समिति द्रोणगिरि जिला छतरपुर।













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