अंतर्मुखी मुनि पूज्य सागर महाराज एवं क्षुल्लक अनुश्रमण सागर महाराज के सानिध्य में श्री दिगम्बर जैन नव ग्रह जिनालय ग्रेटर बाबा परिसर में श्री कल्पद्रुम महामंडल विधान की शुरुआत हुई। इस अवसर पर मुनि श्री पूज्य सागर ने प्रवचन में कहा कि जैन धर्म भाव प्रधान है। आप जितने भावों के साथ बैठकर पूजा करोगे, उतना पुण्य अधिक अर्जन करोगे। पढ़िए यह विशेष रिपोर्ट…
इंदौर। अंतर्मुखी मुनि पूज्य सागर महाराज एवं क्षुल्लक अनुश्रमण सागर महाराज के सानिध्य में श्री दिगम्बर जैन नव ग्रह जिनालय ग्रेटर बाबा परिसर में श्री कल्पद्रुम महामंडल विधान की शुरुआत हुई। इस अवसर पर मुनि श्री पूज्य सागर ने प्रवचन में कहा कि जैन धर्म भाव प्रधान है।

आप जितने भावों के साथ बैठकर पूजा करोगे, उतना पुण्य अधिक अर्जन करोगे। एक मेंढक भावों के साथ पूजा करने भगवान महावीर के समवशरण में जा रहा था।

रास्ते में हाथी के पैर के नीचे कुचल करके मर गया तो वह तुरंत देव बना। जब तिर्यंच देव बन सकता है तो हम तो मनुष्य हैं। हमारे भाव निर्मल होंगे तो हम इस पूजा से परमात्मा तक बन सकते है। उन्होंने कहा कि धार्मिक अनुष्ठानों में कमी नही देखनी चाहिए। यहां हम भक्ति करने आते हैं, वही करनी चाहिए।

हुए कई धार्मिक कार्यक्रम
आयोजन समिति से जुड़े नरेन्द्र वेद, संजय जैन और हितेश कासलीवाल ने बताया कि इस नौ दिवसीय विधान की शुरुआत घटयात्रा के साथ हुई। इसके बाद घटयात्रा, मंगलाष्टक, अभिषेक, पूजन, शांतिधारा, गुरुआज्ञा, दीप प्रज्वलन, मंडप उद्घाटन, मंडप शुद्धि, अंकुरारोपरण के कार्यक्रम हुए।

विधान में ध्वजारोहण भरत जैन परिवार की ओर से और मंडप उद्घाटन नरेंद्र-शकुंतला वैद परिवार की ओर से किया गया। दीप प्रज्वलन आर के जैन परिवार की ओर से किया गया। कलश स्थापना प्रबल गोधा द्वारा की गई।

मुनि श्री का पाद पक्षालन सुदर्शन जटाले ने किया। शास्त्र भेंट मनोज बाकलीवाल, महेंद्र जैन द्वारा किया गया। भव्य समवशरण में मुख्य चक्रवर्ती गजेंद्र जैन द्वारा मुख्य पूजा की गई।

इस अवसर पर समाज के कई लोगों का सम्मान आयोजन समिति की ओर से किया गया। सभी विधि विधान पंडित नितिन झांझरी, विनोद पपगारिया, कीर्तिश जैन के मार्गदर्शन में संपन्न हुए।

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