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आत्मा निराकार हैं, शरीर से ज्यादा फिक्र आत्मा की करें: आचार्य विनिश्चयसागर ने आत्मा का सार बताया 


बहुत से लोगों को जिज्ञासा रहती है कि इस शरीर के अंदर कौन रहता है। बहुत कोशिश की गई, बहुत खोज की गई। बड़े बड़े वैज्ञानिकों ने इसका समाधान पाने के लिए बहुत शोध किए। मरते हुए व्यक्ति को कांच की पेटी में बंद किया। सिर्फ ये देखने के लिए की मरने पर शरीर में से कौन बाहर निकलता है। पढ़िए मनोज नायक की रिपोर्ट…


भिंड। बहुत से लोगों को जिज्ञासा रहती है कि इस शरीर के अंदर कौन रहता है। बहुत कोशिश की गई, बहुत खोज की गई। बड़े बड़े वैज्ञानिकों ने इसका समाधान पाने के लिए बहुत शोध किए। मरते हुए व्यक्ति को कांच की पेटी में बंद किया। सिर्फ ये देखने के लिए की मरने पर शरीर में से कौन बाहर निकलता है। बड़े बड़े कैमरे लगा दिए गए, तराजू को व्यवस्थित कर दिया गया, लेकिन परिणाम शून्य ही आया। न तो शरीर के अंदर रहने वाली आत्मा दिखाई दी, न ही कैमरा कुछ पकड़ पाया। न ही तराजू में कुछ वजन आया । उक्त विचार आचार्य श्री विनिश्चय सागर जी महाराज ने भिंड जैन मंदिर में धर्म सभा को संबोधित करते हुए व्यक्त किए ।

पूज्य गुरुदेव ने कहा कि आत्मा निराकार है। अनादि काल से भगवान जिनेन्द्र देव कहते आए हैं कि आत्मा का न रूप है, न रस है, न गंध है, न स्पर्श है, न ही कोई वजन है। कोई भी मशीन, कोई भी व्यक्ति, कोई भी कैमरा उस आत्मा को पकड़ नहीं पाया। आत्मा इस शरीर में रहती है, जन्म से लेकर मृत्यु तक वह आत्मा हमारे शरीर में ही निवास करती है, लेकिन हम कभी उसका अहसास नहीं कर पाते। क्योंकि हम शरीर को ही सब कुछ मान रहे हैं। शरीर तो वाहन हैं, चालक आत्मा हैं। शरीर को चलाने वाला आत्मा है। इसलिए शरीर से ज्यादा फिक्र आत्मा की करें। जो आपको स्थाई सुख देने वाला सिद्ध होगा ।

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