बुंदेलखंड के प्रथम आचार्य परम पूज्य आचार्य श्री 108 विराग सागर जी मुनिराज के सुयोग्य शिष्य उपाध्याय श्री 108 विकसंतसागर जी मुनिराज की शिष्या आर्यिका 105 श्री विदेह श्री माताजी का गुरुदेव के मुखारविंद से णमोकार मंत्र सुनते हुए अपने इस नश्वर शरीर का त्याग करके देव लोक गमन किया। पढ़िए राजेश जैन दद्दू की रिपोर्ट..
इंदौर/सागर। बुंदेलखंड के प्रथम आचार्य परम पूज्य आचार्य श्री 108 विराग सागर जी मुनिराज के सुयोग्य शिष्य उपाध्याय श्री 108 विकसंतसागर जी मुनिराज की शिष्या आर्यिका 105 श्री विदेह श्री माताजी का गुरुदेव के मुखारविंद से णमोकार मंत्र सुनते हुए अपने इस नश्वर शरीर का त्याग करके देव लोक गमन किया। उनका डोला 12 मई की सुबह श्री 1008 शांतिनाथ दिगंबर जैन मंदिर बालक हिल व्यू से निकला, इसके बाद मंगलगिरी सागर में अंतिम क्रिया संपन्न हुई।
आलोक जैन (अध्यक्ष )एवं समस्त प्रबंधककारणी समिति एवं सकल जैन समाज तिली क्षेत्र सागर के लोग इस मौके पर मौजूद रहे। माताजी का समाचार सुनकर समाज जनों ने अपने-अपने श्रद्धासुमन अर्पित किए। इंदौर दिगंबर जैन समाज समाजिक संसद के अध्यक्ष राजकुमार पाटोदी, सुशील पांड्या, डॉ. जैनेन्द्र जैन, राकेश विनायका, राजेश जैन दद्दू, संजीव जैन संजीवनी आदि ने श्रद्धांजलि अर्पित की।













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