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श्री भक्तामर महामंडल विधान का तीसरा दिन : किसी के आचरण पर अंगुली उठाने से पहले स्वयं के अंदर झांको – मुनि पूज्य सागर


दशा हुमड़ दिगंबर जैन समाज, पारसोला की ओर से अंतर्मुखी मुनि पूज्य सागर महाराज, आर्यिका प्रसन्न मति माताजी और क्षुल्लक अनुश्रमण सागर के सानिध्य में हो रहे श्री भक्तामर महामंडल विधान में तीसरे दिन नौ काव्य की आराधना करते हुए 504 श्रीफल के साथ 504 अर्घ्य सौधर्म इन्द्र अजित-मांगी बाई ने समर्पित किए। सुबह 5 बजे से अनार, अंगूर, दही, दूध से भगवान का अभिषेक अनुष्ठान में बैठे 108 श्रावक-श्राविकाओं द्वारा किया गया। पढ़िए यह विशेष रिपोर्ट…


पारसोला। अंतर्मुखी मुनि पूज्य सागर महाराज, आर्यिका प्रसन्न मति माताजी और क्षुल्लक अनुश्रमण सागर के सानिध्य में चल रहे सात दिवसीय श्री भक्तामर महामंडल विधान अनुष्ठान के तीसरे दिन नौ काव्य की आराधना करते हुए 504 श्रीफल के साथ 504 अर्घ्य सौधर्म इन्द्र अजित-मांगी बाई ने समर्पित किए। भक्तामर के 48 काव्यों में 19 काव्य की आराधना पूर्ण हो चुकी है। सुबह 5 बजे से अनार, अंगूर, दही, दूध से भगवान का अभिषेक अनुष्ठान में बैठे 108 श्रावक-श्राविकाओं द्वारा किया गया। अभिषेक में शांतिधारा का सौभाग्य विशाल अंकिता मकनावत को प्राप्त हुआ। कार्यक्रम का आयोजन दशा हुमड़ दिगंबर जैन समाज, पारसोला की ओर से किया जा रहा है। शाम को दीपक से भक्तामर की आराधना श्रीपाल मैदावत परिवार द्वारा की गई। संपूर्ण विधि विधान का कार्यक्रम पंडित कीर्ति जैन ने किया ।

संतों की निंदा करने वाला घूमता है कुगतियों में

इस अवसर पर अंतर्मुखी मुनि पूज्य सागर महाराज ने प्रवचन में कहा कि किसी के आचरण पर अंगुली उठाने से पहले स्वयं के अंदर झांकना चाहिए। दूसरों को देखने के चक्कर में हम अपने भीतर के गुणों को भूल जाते हैं और परनिंदा करने लग जाते हैं। जो संतों की निंदा करता है, वह कुगतियों में घूमता रहता है। हम अगर मुनियों की साधना में सहयोगी नहीं बन सकते तो उनकी निंदा-आलोचना करने के अधिकारी भी हम नहीं है। मुनियों का आहार, विहार, निहार श्रावक के अधीन होता है। अगर श्रावक उसमें सहयोग नहीं करेंगे तो उनकी चर्या में शिथिलता आना निश्चित है। अगर कोई मुनि अपनी चर्या में शिथिल हुआ है तो उसका कारण श्रावकों की उदासीनता ही है। आज से आप सभी प्रतिज्ञा करें कि मन, वचन, काय से कभी भी, किसी भी परिस्थिति में गुरुओं की निंदा नहीं करेंगे और न ही सुनेंगे।

राम बनना चाहते हैं तो क्रिया भी वैसी हो

आप राम बनना चाहते हैं लेकिन क्रिया तो रावण की है। अहंकार, मद, मद द्वेष इतना भरा हुआ है कि उसमें हमें यह भी नहीं समझ में नहीं आता है कि हम कहीं देव, शास्त्र, गुरु की निंदा तो नहीं कर रहे है। राम का नाम मात्र जुबान पर तो है लेकिन आचरण में नहीं रहा है। स्वयं के बच्चे गलती करें, आपकी सुनें नहीं तो आप राम बन जाते हैं, दूसरा कोई करे तो रावण बन जाते हैं।

21 अप्रैल को होगा विशेष अनुष्ठान

विधान के समापन पर 21 अप्रैल को एक विशेष अनुष्ठान होगा। यह अनुष्ठान ज्योतिष के आधार पर 12 राशि, 27 नक्षत्र, 9 ग्रहों के आधार पर होगा। इस अवसर पर विशेष हवन और पूजन भी होगा।

इनका भी सहयोग रहा

कार्यक्रम में जयंतीलाल कोठरी, बाबूलाल सरिया, प्रकाश पंचोरी, महावीर मेदावत, दीपेश वेगरिया, आदेश घाटलिया, चंदमल राजावत, रमेश वेगरिया, पारसमल वेगरिया, सूरजमल पंचोरी, सूरजमल कड़वावत, संदीप वेगरिया, कुलदीप वेगरिया, मांगलीलाल वेगरिया, संजय वेगरिया रमेश पंचोरी आदि का भी सहयोग रहा।

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