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जीव कर्म बन्धनों को तोड़कर स्वतन्त्र होना चाहता है-जय निशांत: सोमवार 11 बजे हेलीकॉप्टर से होगी पुष्पवर्षा


सारांश

मुरेना के ज्ञानतीर्थ जैन मंदिर में चल रहे पंचकल्याणक प्रतिष्ठा महोत्सव के पांचवें दिन रविवार को ज्ञान कल्याणक महोत्सव के अवसर पर धर्मसभा और अन्य कार्यक्रम आयोजित किए गए।


मुरेना (मनोज नायक) मेघपटल को भेदकर जैसे सूर्य की रश्मियां बाहर आना चाहती हैं, एरण्ड का बीज कबच को तोड़कर जैसे बाहर आने के लिए कसमसाता है, ठीक उसी प्रकार यह जीव कर्म बन्धनों को तोड़कर स्वतंत्र यानी स्वाधीन होना चाहता है । उक्त विचार रविवार को प्राण प्रतिष्ठा महोत्सव के प्रतिष्ठाचार्य जयकुमार निशांत ने धर्मसभा को सम्बोधित करते हुए व्यक्त किये । यह धर्मसभा

श्री ज्ञानतीर्थ जैन मंदिर में चल रहे पंचकल्याणक प्रतिष्ठा महोत्सव के पांचवें दिन रविवार को ज्ञान कल्याणक महोत्सव के अवसर पर आयोजित की गई थी।

इस अवसर पर टीकमगढ़ के मुख्य प्रतिष्ठाचार्य ब्रह्मचारी जयकुमार निशांत, खुरई के प्रतिष्ठाचार्य ब्रह्मचारी नितिन भैयाजी, टीकमगढ़ के सह प्रतिष्ठाचार्य मनीष भैयाजी ने दिव्य मंत्रोच्चार पूर्वक मांगलिक क्रियाओं से भगवान का अभिषेक, शांतिधारा एवं पूजन किया। इसके बाद ज्ञान कल्याणक पूजन, शांति हवन, ज्ञान संस्कार विधि, समवशरण की रचना एवं दिव्य देशना आदि धार्मिक अनुष्ठान हुए ।

इंद्र-इंद्राणियों ने देव-शास्त्र-गुरु की पूजन के साथ अष्ट द्रव्यों से भगवान की पूजा, अर्चना, स्मरण, ध्यान कर ज्ञान कल्याणक का अर्घ्य समर्पित किया। भगवान आदिनाथ का समवशरण हुआ और सप्तम पट्टाचार्य श्री ज्ञेयसागर जी महाराज एवं दिगम्बराचार्य श्री विनीत सागर जी महाराज ने श्री आदिनाथ भगवान की 16 फुट की विशाल एवं भव्य मूर्ति को सूर्य मंत्र देकर प्रतिष्ठित किया ।

ऐसे हुआ कार्यक्रम

दिगम्बराचार्य श्री ज्ञेयसागर जी एवं श्री विनीत सागर जी महाराज ससंघ के पावन सान्निध्य एवं स्वस्तिधाम प्रणेत्री गुरुमां गणिनी आर्यिका स्वस्तिभूषण माताजी के मुख्य निर्देशन एवं गणिनी आर्यिका लक्ष्मीभूषण माताजी, गणिनी आर्यिका सृष्टीभूषण माताजी, गणिनी आर्यिका आर्षमति माताजी के सान्निध्य में चल रहे प्राण प्रतिष्ठा महोत्सव के प्रतिष्ठाचार्य श्री जयकुमार निशांत ने ज्ञानकल्याणक के संदर्भ में बताया कि महामुनि आदिनाथ स्वामी ने दीक्षा ग्रहण कर छः माह की साधना का संकल्प किया ।

साधना के छः माह बाद आहारचर्या को निकले परन्तु श्रावक उनके आहार की विधि से अनभिज्ञ होने के कारण उनको आहार न दे सके । तव राजा श्रेयांस ने स्वप्न में पूर्व पर्याय में आहारचर्या का ज्ञान प्राप्त करके महामुनि का पड़गाहन कर, नवधाभक्ति पूर्वक आहार प्रदान किया ।मुनिराज आदिनाथ स्वामी ने मात्र तीन अंजुली आहार लेकर वैशाख शुक्ल तृतीया को अक्षय तृतीया के रूप में प्रसिद्ध किया । आहार के पश्चात राजा सोम के यहां पंचाश्चर्य हुए । आहार लेकर मुनिराज वट बृक्ष के नीचे ध्यानस्त हुए । उन्होंने आत्म चिंतन करते हुए घातिया कर्मों का क्षय करके केवल ज्ञान प्राप्त किया ।

केवलज्ञान प्राप्त होने पर कुवेर ने समवशरण की रचनाकर आदिकुमार की पूजा अर्चना की । समोशरण का उद्घाटन विपिन जैन अतुल जैन शांति मोहल्ला दिल्ली ने किया । आदिकुमार ने दिव्यध्वनि के माध्यम से जीवों को संसार के दुखों से छुटकारा पाने का उपदेश देकर सभी का कल्याणमार्ग प्रशस्त किया ।

सोमवार को निर्वाण

महोत्सव के प्रचार प्रसार संयोजक मनोज नायक एवं अभिषेक जैन टीटू ने जानकारी देते हुए बताया कि सोमवार को प्रातःकालीन व्रह्ममुहूर्त में आदिनाथ स्वामी को निर्वाण की प्राप्ति होगी । आदिनाथ ज़ी को मोक्ष प्राप्ति के पावन अवसर पर एक विशाल एवं भव्य शोभायात्रा निकाली जाएगी ।

ततपश्चात भगवान आदिनाथ का महामस्तकाभिषेक होगा इस पावन अवसर पर सम्पूर्ण ज्ञानतीर्थ क्षेत्र पर प्रातः 11.30 बजे हेलीकॉप्टर द्वारा पुष्प वर्षा होगी । पुष्प वर्षा के लिए हेलीकॉप्टर जयपुर से उड़ान भरकर ज्ञानतीर्थ क्षेत्र मुरेना में उतरेगा । अम्बाह नगर पालिका के पूर्व अध्यक्ष जिनेश जैन ने बताया कि हेलीकॉप्टर लगभग एक घण्टे के अंदर चार बार उड़ान भरेगा और निरन्तर ज्ञानतीर्थ क्षेत्र की परिक्रमा लगाता हुआ पुष्पवर्षा करता रहेगा ।

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