यूजीसी के सचिव प्रोफ़ेसर रजनीश जैन के मुख्य आतिथ्य में हुआ उदघाटन
स्वतंत्रता संग्राम में जैन समाज का अविस्मरणीय अवदान : प्रो.रजनीश जैन , सचिव यूजीसी
आजादी के अमृत महोत्सव के अंतर्गत हुआ आयोजन
इंदौर (मध्य प्रदेश )। विजयनगर इंदौर स्थित श्री पंच बालयति मंदिर परिसर में स्थित तीर्थंकर वाटिका में आजादी के अमृत महोत्सव के अंतर्गत ब्रह्मचारी सुरेश भैया जी एवं ब्र. जिनेश मलैया जी के निर्देशन में आयोजित कार्यक्रम में स्वतंत्रता संग्राम में जैन समाज का अवदान चित्र प्रदर्शनी का उदघाटन विश्वविद्यालय अनुदान आयोग के सचिव प्रोफेसर रजनीश जैन के मुख्य आतिथ्य में किया गया।
सर्वप्रथम मुख्य अतिथि एवं देश के विभिन्न अंचलों से उपस्थित देश के मूर्धन्य जैन मनीषियों की गणमान्य उपस्थिति में फीता काटकर के प्रदर्शनी का उदघाटन किया गया, इसके बाद उपस्थित मुख्य अतिथि एवं विद्वानों का पंच बालयति मंदिर समिति की ओर से सम्मान किया गया । इसके बाद सभा का आयोजन प्रतिष्ठाचार्य ब्रह्मचारी जय कुमार जी निशांत भैया के मंगलाचरण से किया गया तत्पश्चात वक्ताओं ने पंच बालयति मंदिर द्वारा संचालित विभिन्न गतिविधियों की जानकारी दी । इस अवसर पर ‘स्वतंत्रता संग्राम में जैन’ इस पुस्तक की लेखिका डॉ ज्योति जैन खतौली ने मुख्य अतिथि प्रोफेसर रजनीश जैन को उक्त पुस्तक भेंट की । इस मौके पर शास्त्रि- परिषद के अध्यक्ष डॉ श्रेयांस कुमार जैन बड़ौत, ब्रह्मचारी जय कुमार जी निशांत भैया टीकमगढ़ ,पंडित विनोद कुमार जी जैन रजवास , डॉ. सुनील जैन संचय ललितपुर आदि ने अपने विचार व्यक्त किए।
मुख्य अतिथि प्रोफ़ेसर रजनीश जैन इस मौके पर कहा की भारत सरकार देश की स्वतंत्रता के 75 के उपलक्ष्य में आजादी का अमृत महोत्सव धूमधाम से मना रहा है। देश को स्वतंत्र कराने में जैन समाज का भी अविस्मरणीय योगदान रहा है। हजारों लोगों ने स्वतंत्रता के संग्राम में अपना अहम योगदान दिया है। ‘स्वतंत्रता संग्राम में जैन’ इस पुस्तक में बहुत ही महत्वपूर्ण जानकारियां संकलित की गई हैं ,जो कि ऐतिहासिक दस्तावेज से कम नहीं है।
इस मौके पर उपस्थित अतिथियों, विद्वतजनों को स्वतंत्रता संग्राम में जैन एवं जैन गौरव गाथा पुस्तकें भेंट में दी गई । सभी विद्वानों का वात्सल्य भोज भी पंच बालयति मंदिर में हुआ।
इस मौके पर देश के गणमान्य विद्वान प्रोफ़ेसर वृषभ प्रसाद जी लखनऊ, डॉ श्रेयांस कुमार जैन बड़ौत, प्रोफ़ेसर श्रीयांश सिंघई जयपुर, ब्रह्मचारी जयकुमार जैन निशांत टीकमगढ़, प्रोफ़ेसर अशोक कुमार जैन वाराणसी ,डॉ ज्योति जैन खतौली ,डॉ सुरेंद्र जैन भारती बुरहानपुर, पंडित सनतकुमार जैन, पंडित विनोद जैन रजवास , डॉ अनुपम जैन इंदौर, डॉ सुनील जैन संचय ललितपुर, डॉ पंकज जैन इंदौर , डॉ बाहुबली जैन इंदौर, डॉ आशीष जैन आचार्य, सागर, डॉ भरत जैन इंदौर, सुशीला सालगिया इंदौर , डॉ आशीष जैन शास्त्री दमोह, सुरेश मारौरा इंदौर , पंडित अशोक जैन आदि विद्वानों के साथ डी के जैन पूर्व डीएसपी, स्थानीय पार्षद बालमुकुंद सोनी, सतीश जैन , प्रदीप टडा गणमान्यजनों की उपस्थिति उल्लेखनीय रही । संचालन डॉ अरविंद जैन ने किया।
सभी विद्वानों ने स्वतंत्रता संग्राम में जैन चित्र प्रदर्शनी का बारीकी से अवलोकन किया और इस संकलन को ऐतिहासिक दस्तावेज बताते हुए स्वतंत्रता संग्राम में जैन समाज के अवदान का स्मरण किया। अंत में आभार एवं धन्यवाद ज्ञापन पंचायती मंदिर के निर्देशक ब्रह्मचारी सुरेश भैया जी एवं ब्र. जिनेश मलैया जी ने व्यक्त किया।
स्वतंत्रता संग्राम के जैन वीर जिन्होंने जेलों में भी जैनत्व संस्कार का पालन किया :
भारत की आजादी के संग्राम में अनेकानेक देश प्रेमियों तथा आजादी के दीवानों ने स्वतंत्रता संग्राम की इस लड़ाई में शहादत देकर तथा जेल की यातनाओं को सहकर भारत को स्वतंत्रता दिलाने में सहयोग दिया।
प्राप्त जानकारी के अनुसार जैन धर्मावलंबी अनेक जैन वीरों ने भी आजादी के इस महायज्ञ में अपना सर्वस्व समर्पण किया है। स्वतंत्रता संग्राम के जैन वीर जिन्होंने जेलों में भी जैनत्व संस्कार का पालन किया। ग्वालियर नरेश के खजांची अमर शहीद अमरचंद जी बांठिया ने खजाना खोलकर आजादी के दीवानों की सहायता की। बहादुरशाह जफर के दोस्त लाला हुकमचंद जैन व उनके भतीजे फकीरचंद जैन को उन्हीं के मकान के आगे फाँसी पर लटका दिया । इसी तरह मोतीचंद शाह, उदयचंद जैन, साबूलाल जैन, अर्जुनलाल सेठी जैसे अनेक क्रांतिकारी सेनानियों के कारनामों से इतिहास भरा पड़ा है। डॉ. कपूरचंद जैन एवं डॉ. श्रीमती ज्योति जैन खतौली ने इस संबंध में खोजबीन की है और उन्होंने भरसक प्रयत्न किया है उन जैन वीरों को खोजने का जिन्होंने स्वतन्त्रता संग्राम में अपनी आहुति दी है। लगभग ५ हजार से भी अधिक जैन धर्मावलंबी जेल गये और सैकड़ों जैनियों ने जेल से बाहर रहकर तन—मन—धन से बढ़ चढ़कर तथा हर संभव सहयोग दिया ।
इंदौर में लगाई गई इस चित्र प्रदर्शनी में ऐसे ही वीरों की प्रदर्शनी लगाई गई जिसमें उनके अवदान को रेखांकित किया गया।
















