कुचामन सिटी स्थित श्री 1008 भगवान महावीर दिगम्बर जैन मंदिर में आयोजित नौ दिवसीय श्री 1008 सिद्धचक्र महामंडल विधान का समापन हवन एवं पूर्ण धार्मिक विधानों के साथ सम्पन्न हुआ। श्रद्धालुओं ने 1024 अर्घ्य समर्पित कर विश्व शांति एवं सर्वजन मंगल की प्रार्थना की। पढ़िए श्रीफल साथी सुभाष पहाड़िया की यह रिपोर्ट।
कुचामन सिटी। श्री 1008 भगवान महावीर दिगम्बर जैन मंदिर, डीडवाना रोड, कुचामन सिटी में अष्टान्हिका पर्व के अंतर्गत आयोजित नौ दिवसीय श्री 1008 सिद्धचक्र महामंडल विधान का नवम एवं अंतिम दिवस श्रद्धा, भक्ति और धार्मिक उत्साह के साथ सम्पन्न हुआ। पूरे आयोजन के दौरान विश्व शांति, सुख-समृद्धि एवं सर्वजन कल्याण की मंगलकामनाएं की गईं।
कलशाभिषेक एवं शांतिधारा का मिला सौभाग्य
कलशाभिषेक एवं शांतिधारा का सौभाग्य श्रीमती मंजू देवी, विमल, अनिता, मुकेश, डिम्पल, अमित एवं नीलम काला परिवार (जिलीया) तथा श्रीमती सलोचना देवी, रोजश कुमार, ममता, मुकेश, सुमति, मनीषा, रितिक एवं भव्य गंगवाल परिवार (लादड़िया वालों) को प्राप्त हुआ। विधान समापन पर जलधारा का पुण्यलाभ चिरजीलाल, अशोक एवं भव्य पाटोदी परिवार ने प्राप्त किया। ममता पांड्या ने शांतिधारा का वाचन किया।
1024 अर्घ्य एवं हवन से विश्व मंगल की प्रार्थना
लालचंद पहाड़िया एवं माणकचंद काला ने बताया कि अष्टान्हिका पर्व में सिद्धचक्र विधान का विशेष धार्मिक महत्व है। नवम दिवस नित्य नियम पूजन के उपरांत श्रद्धालुओं ने भगवान के चरणों में 1024 अर्घ्य समर्पित किए। इसके पश्चात हवन में आहुतियां देकर विश्व में शांति, अमन-चैन, अराजकता के नाश तथा समस्त जीवों के कल्याण की मंगलभावना व्यक्त की गई।
श्रद्धालुओं ने उत्साहपूर्वक किया धर्मलाभ
हवन एवं पूजन-विधान में भंवरलाल, कमला झाझरी, माणकचंद, चंदा काला, सुरेशकुमार, संतोष पांड्या, तेजकुमार, शकुंतला बड़जात्या, लालचंद पहाड़िया, अमित पाटोदी, संतोष पहाड़िया, कमला देवी, हीरामणी, बबीता, कुसुम पाटोदी, शांति देवी, पुष्पा अजमेरा, मैना देवी, सुशीला, सलोचना, सरला, रेखा पहाड़िया, ज्ञानमती, आभा, हीरा, विनीता, ममता पांड्या, मंजू, संतोष, श्रीमती महावीर प्रसाद काला, तारा देवी, सुनीता गंगवाल एवं संतोष ठोल्या (नावा) सहित बड़ी संख्या में श्रावक-श्राविकाओं ने सहभागिता कर धर्मलाभ अर्जित किया।
भक्ति के साथ सम्पन्न हुआ नौ दिवसीय विधान
नौ दिनों तक चले इस धार्मिक आयोजन में प्रतिदिन पूजन, अभिषेक, शांतिधारा, सिद्धचक्र विधान एवं धार्मिक अनुष्ठान सम्पन्न हुए। अंतिम दिवस हवन एवं मंगलकामनाओं के साथ आयोजन का समापन हुआ













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