गुरु पूर्णिमा पर कुण्डलपुर में निर्यापक श्रमण मुनि श्री 108 समता सागर जी महाराज ने गुरु महिमा का वर्णन करते हुए गुरु को आत्मज्ञान का प्रकाश फैलाने वाला सूर्य बताया। समारोह में आचार्य श्री विद्यासागर जी महाराज के व्यक्तित्व एवं कृतित्व का भावपूर्ण स्मरण किया गया। पढ़िए श्रीफल साथी राजीव सिंघई की यह रिपोर्ट।
कुण्डलपुर (दमोह, म.प्र.)। गुरु पूर्णिमा के पावन अवसर पर विश्व वंदनीय संत शिरोमणि आचार्य श्री विद्यासागर जी महाराज के शिष्य एवं आध्यात्म विद्या शिरोमणि आचार्य श्री समयसागर जी महाराज के आज्ञानुवर्ती निर्यापक श्रमण मुनि श्री 108 समता सागर जी महाराज ने गुरु महिमा का विस्तृत निरूपण करते हुए कहा कि सद्गुरु ज्ञान रूपी अमृत को जन-जन तक पहुँचाने वाले सूर्य के समान हैं। गुरु ही अज्ञान के अंधकार को दूर कर आत्मज्ञान का प्रकाश फैलाते हैं।
गुरु आत्मविजय का मार्ग दिखाते हैं
राष्ट्रीय प्रवक्ता अविनाश जैन एवं प्रचारमंत्री जयकुमार जैन जलज ने बताया कि धर्मसभा में मुनिश्री ने भारतीय गुरु परंपरा की महिमा का वर्णन करते हुए कहा कि जिसने अपने मन, इंद्रियों और इच्छाओं पर विजय प्राप्त कर ली, वही वास्तविक विजेता है। उन्होंने सम्राट सिकंदर और दिगंबर आचार्य के ऐतिहासिक प्रसंग के माध्यम से आत्मानुशासन एवं आत्मविजय का संदेश दिया।
आचार्य विद्यासागर जी के व्यक्तित्व का किया स्मरण
मुनिश्री ने कहा कि भगवान महावीर, आचार्य कुंदकुंद और आचार्य शांतिसागर से प्रवाहित गुरु परंपरा आचार्य श्री विद्यासागर जी महाराज तक पहुँची, जिन्होंने तप, त्याग, ज्ञान और करुणा से समाज को नई दिशा प्रदान की। उन्होंने कहा कि आचार्य श्री का जीवन मूलाचार और समयसार का सजीव स्वरूप था तथा वे संपूर्ण मानवता के प्रेरणास्रोत रहे।
बड़े बाबा प्रकरण का प्रेरक प्रसंग
अपने प्रवचन में मुनिश्री ने कुण्डलपुर बड़े बाबा मंदिर प्रकरण का उल्लेख करते हुए बताया कि सर्वोच्च न्यायालय में विचाराधीन मामले के दौरान आचार्य श्री विद्यासागर जी महाराज ने केवल इतना कहा था— “बड़े बाबा का कार्य सत्य से जुड़ा है, इसलिए सत्य की ही विजय होगी।” उन्होंने वरिष्ठ अधिवक्ता गोपाल सुब्रमण्यम के आचार्य श्री के प्रति श्रद्धाभाव एवं उनके आशीर्वाद से जुड़े प्रेरक प्रसंग का भी उल्लेख किया।
सद्गुरु जीवन का वास्तविक रूपांतरण करते हैं
मुनिश्री ने कहा कि संसार में धन लेने वाले अनेक गुरु मिल सकते हैं, लेकिन मन को जीतकर जीवन का रूपांतरण करने वाले सद्गुरु अत्यंत दुर्लभ होते हैं। वर्तमान पंचम काल में भी गुरु और मुनिराजों का सान्निध्य मिलना महान सौभाग्य है। उन्होंने सभी श्रद्धालुओं से योग्य गुरु का आश्रय लेकर मोक्षमार्ग पर अग्रसर होने का आह्वान किया।
108 दीपों से महाआरती एवं गुरु मंत्र का लाभ
गुरु पूर्णिमा महोत्सव के अंतर्गत विद्याभवन में गुरु गौतम स्वामी एवं आचार्य श्री विद्यासागर जी महाराज का पूजन सम्पन्न हुआ। 108 दीपों से भव्य महाआरती की गई तथा निर्यापक श्रमण मुनि श्री समता सागर जी महाराज ने श्रद्धालुओं को गुरु मंत्र प्रदान कर आत्मकल्याण का संदेश दिया।













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