मुरैना में वर्षायोग धर्मसभा के दौरान मुनिश्री उपशांतसागर महाराज ने श्रेष्ठ विचारों और संस्कारों को जीवन का वास्तविक वैभव बताया। वहीं आचार्य उदारसागर महाराज ने सदाचार, संयम और अच्छे कर्मों को आत्मकल्याण का आधार बताया। पढ़िए श्रीफल साथी मनोज जैन नायक की यह रिपोर्ट।
मुरैना। श्री पार्श्वनाथ दिगम्बर जैन पंचायती बड़ा मंदिर में आयोजित वर्षायोग धर्मसभा में दिगम्बर जैनाचार्य 108 श्री उदारसागर महाराज एवं मुनिश्री उपशांतसागर महाराज ने श्रद्धालुओं को धर्म, संयम, सदाचार और आत्मकल्याण का प्रेरणादायी संदेश दिया। धर्मसभा में बड़ी संख्या में श्रद्धालुओं ने उपस्थित होकर प्रवचनों का लाभ प्राप्त किया।
श्रेष्ठ विचार ही मनुष्य की सबसे बड़ी संपत्ति
मुनिश्री उपशांतसागर महाराज ने कहा कि मनुष्य का वास्तविक वैभव उसके घर, धन या बाहरी साधनों से नहीं, बल्कि उसके विवेक, संस्कार और श्रेष्ठ विचारों से मापा जाता है। उन्होंने कहा कि यदि व्यक्ति की सोच सकारात्मक और धर्ममय है, तो छोटी-सी झोपड़ी भी आनंद और शांति का केंद्र बन सकती है।
उन्होंने कहा कि आज मनुष्य बाहरी सुख-सुविधाओं के पीछे भाग रहा है, जबकि वास्तविक सुख आत्मशुद्धि, संयम और सद्विचारों में निहित है। क्रोध, मान, माया और लोभ जीवन को अशांत बनाते हैं। भगवान महावीर के संदेश का स्मरण कराते हुए उन्होंने कहा कि प्रत्येक व्यक्ति अपने कर्मों का स्वयं निर्माता है। इसी संदर्भ में उन्होंने कहा, “मनुष्य की झोपड़ी कैसी भी हो, लेकिन उसकी खोपड़ी अच्छी होना चाहिए।”
अच्छे कर्म ही पाप से बचाते हैं
जैनाचार्य श्री उदारसागर महाराज ने कहा कि जीवन के सुख-दुःख, मान-अपमान और सभी परिस्थितियाँ मनुष्य के कर्मों का परिणाम हैं। यदि पाप कर्मों से बचना है तो केवल भय पर्याप्त नहीं, बल्कि सत्य, अहिंसा, दया, सेवा, ईमानदारी और आत्मसंयम जैसे श्रेष्ठ गुणों को जीवन में अपनाना आवश्यक है।
उन्होंने कहा कि पूजा-पाठ तभी सार्थक है, जब उसका प्रभाव व्यक्ति के व्यवहार और चरित्र में दिखाई दे। आचार्यश्री ने युवाओं से नैतिक मूल्यों पर चलने, प्रतिदिन आत्मावलोकन करने तथा शुभ विचार, शुभ वचन और शुभ आचरण को जीवन का आधार बनाने का आह्वान किया।
9 अगस्त को होगी वर्षायोग मंगल कलश स्थापना
आध्यात्मिक वर्षायोग समिति के मुख्य संयोजक राजेंद्र जैन (दयेरी वाले) ने बताया कि रविवार, 9 अगस्त को वर्षायोग मंगल कलश स्थापना का भव्य समारोह आयोजित किया जाएगा। देशभर से सैकड़ों गुरु भक्त एवं साधर्मी बंधुओं के इसमें शामिल होने की संभावना है। आयोजन में धार्मिक एवं सांस्कृतिक कार्यक्रम भी होंगे तथा समिति द्वारा व्यापक तैयारियाँ की जा रही हैं।
प्रतिदिन प्रवचन, गुरुभक्ति और प्रश्न मंच
श्री पार्श्वनाथ दिगम्बर जैन पंचायती बड़ा मंदिर कमेटी के ऑडिटर डॉ. मनोज जैन (प्रोफेसर) ने बताया कि वर्षायोग के दौरान प्रतिदिन प्रातः 8:00 से 9:30 बजे तक आचार्यश्री उदारसागर महाराज एवं मुनिश्री उपशांतसागर महाराज के मंगल प्रवचन आयोजित किए जा रहे हैं। सायंकाल गुरुभक्ति, आरती एवं प्रश्न मंच का आयोजन होता है, जिसमें सही उत्तर देने वाले बच्चों एवं मातृशक्ति को सम्मानित किया जाता है। रात्रि में श्रावक एवं युवा आचार्य संघ की वैयावृत्ति का सौभाग्य प्राप्त कर रहे हैं, जिससे युवाओं में धर्म के प्रति विशेष उत्साह और सक्रिय सहभागिता देखने को मिल रही है।
धर्म और संस्कारों का संदेश
धर्मसभा में दोनों संतों ने स्पष्ट किया कि मनुष्य का वास्तविक उत्थान बाहरी वैभव से नहीं, बल्कि श्रेष्ठ विचार, संयम, सदाचार और सत्कर्मों से होता है। उन्होंने सभी श्रद्धालुओं से धर्म को व्यवहार में उतारकर आत्मकल्याण एवं समाज कल्याण का मार्ग अपनाने का आह्वान किया।













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