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सृष्टि की अवस्था और सृष्टि का ज्ञान बहुत जरूरी है : नवीन वेदियों का विधि विधान के साथ हुआ शिलान्यास 


सृष्टि की अवस्था को जानें सृष्टि का ज्ञान बहुत जरूरी है। जब तक तुम सृष्टि की अवस्था का ज्ञान नहीं करोगे तुम्हारे लिए सृष्टि समझ में ही नहीं आएगी। यह उद्गार आदिश्वर धाम सुभाषगंज मैदान में मुनि श्री सुधासागरजी महाराज ने व्यक्त किए। वे धर्मसभा को संबोधित कर रहे थे। अशोकनगर से पढ़िए, राजीव सिंघई मोनू की यह खबर..


अशोक नगर। सृष्टि की अवस्था को जानें सृष्टि का ज्ञान बहुत जरूरी है। जब तक तुम सृष्टि की अवस्था का ज्ञान नहीं करोगे तुम्हारे लिए सृष्टि समझ में ही नहीं आएगी। यह उद्गार आदिश्वर धाम सुभाषगंज मैदान में मुनि श्री सुधासागरजी महाराज ने व्यक्त किए। वे धर्मसभा को संबोधित कर रहे थे। उन्होंने कहा कि अभी सृष्टि को समझने का उपदेश चल रहा है, कहीं अंतिम समय तक आप जिंदगी की व्यवस्थाओं में ही ना लगे रहें। इस जिंदगी को तीन भागों में बांटकर अपने जीवन को व्यवस्थित करें। बालक, युवा तीसरे वृद्ध अवस्था इसको दो भागों में विभाजन कर प्रोढ़ भाग में तुम अपने अधीनस्थ की व्यवस्था बनाओ जवानी में तो आपने स्वयं की व्यवस्था बनाई। अब प्रोढ़ अवस्था में आपको अपने बेटा बिटिया के जीवन की सारी व्यवस्थाओं को व्यवस्थित करना आपका प्रथम दायित्व है।

बालपन के बाद जवानी आते ही युवा स्वयं को संभालें 

मुनिश्री ने कहा कि बालपन के बाद जवानी आते ही युवा स्वयं को संभाल होगा। तब तुम्हारी पढ़ाई-लिखाई भोजन आदि की सुविधाएं आपको परिवार से मिलती हैं। विद्यार्थी जब तक पढ़ रहा है सारी व्यवस्थाएं परिवार करेगा। शादी के बाद स्वयं की आवश्यकताओं की पूर्ति करते हुए घर गृहस्थी को भी चलना है। ये विधि महापुराण में लिखी है। डॉ. अंबेडकर जैन दर्शन के बहुत बड़े ज्ञाता थे। उन्होंने सेवा काल का समय कानूनी रूप से निश्चित किया है। ये आगम में लिखा है। साठ साल के बाद कर्म बंध भी दुगुनी गति से होने लगेगा। जैसे नदी पर खतरे के निशान से ऊपर पानी बढ़ते ही अपने आप को सावधान किया जाता है। वैसे ही 60 वर्ष के बाद भी वही काम कर रहा है। साठ वर्ष के बाद अपने जीवन के दो भाग करते हुए अपने जीवन के साथ बच्चों की व्यवस्था करे। दस साल तक व्यवस्था करना, अगल चरण में अपने आप को व्यवस्थित करें अवस्था को देखते हुए धीरे-धीरे व्यापार धन्धा कपड़ा आदि शादी में परिवार तक जाते हुए अपने वानप्रस्थ की तैयारियां 12 वर्षाे में सब कुछ छोड़ना है। निर विकल्प निर द्रव्य हो जाएं। इस तरह की जिंदगी जीने पर सब कुछ करने पर भी उसका खाता सही रहेगा। गृहस्थ रहते हुए भी आप संयम की ओर बढ़ते चले जाना है।

शांति नगर त्रिकाल चौबीस सुधर्मोदय तीर्थ क्षेत्र कोे पहचानेंगे

इसके पहले धर्मसभा में जैन समाज के मंत्री विजय धुर्रा ने कहा कि मुनि श्री सुधासागरजी ने त्रिकाल चौबीस जिनालय को श्री दिगंबर जैन धर्माेदय तीर्थ क्षेत्र नाम देते हुए इसको विकसित करने रूप चार वेदियों का शिलान्यास प्रतिष्ठाचार्य प्रदीप भैया के मंत्रोच्चार के बीच किया गया। जिसका सौभाग्य प्रदीपकुमार, मनोजकुमार, संजीव कुमार कांसल परिवार, प्रदीप कटपीस, महेंद्र कुमार रोमिल, डॉ. कमलेश उमेश कांसल अर्चित कांसल संजीवकुमार, मनोजकुमार साहिल ,यश महावीर स्वीट्स, नेमीचंद आनंदकुमार, नरेंद्रकुमार, नवीन, राजीव, मनोज, मनीष, आशीष, अभिषेक, अनुराग ठेकेदार परिवार सहित अन्य प्रमुख जनों को मिला। इस दौरान अन्य शिलाएं भी स्थापित की गई। सभी का सम्मान जैन समाज अध्यक्ष राकेश कांसल, महामंत्री राकेश अमरोद कोषाध्यक्ष सुनील अखाई सहित अन्य प्रमुख जनों ने किया।

सुधा सागर संत निवास का हुआ शिलान्यास

शुक्रवार अशोक नगर जैन समाज के लिए उपलब्धियों से भरा रहा। आज धर्मोंदय तीर्थ क्षेत्र पर नवीन मुनि श्रीसुधासागरजी संत निवास का शिलान्यास प्रतिष्ठाचार्य प्रदीप भैया के मंत्रोच्चार के बीच हुआ। संत सुधा सागर संत शाला शिलान्यास जैन समाज अध्यक्ष राकेश कांसल, उपाध्यक्ष अजित वरोदिया, महामंत्री राकेश अमरोद, संजीव महावीर स्वीट्स, रमेशचंद्र प्रकाशचंद्र जामनेर, धर्मेंद रोकड़िया, केवलचंद भैसरवासए अजित वरोदियाए अशोक टिंग मिल, नेमीचंद्र ठेकेदार, आनंद ठेकेदार, नवीन ठेकेदार परिवार ने सामुहिक रूप से किया। इस दौरान भक्तों की जयकार के बीच शिलान्यास की विधि की गई।

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