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संत सुरक्षा को लेकर इंदौर में मौन जुलूस, राष्ट्रीय नीति व सुरक्षा प्रोटोकॉल लागू करने की मांग: रीवा हादसे के विरोध में जैन समाज ने सौंपा ज्ञापन, कलेक्टर से मुलाकात की मांग को लेकर कुछ देर चला प्रदर्शन


रीवा हादसे के बाद संतों की सुरक्षा को लेकर इंदौर में जैन समाज ने मौन जुलूस निकालकर प्रशासन को ज्ञापन सौंपा। समाज ने राष्ट्रीय संत सुरक्षा नीति, सुरक्षा प्रोटोकॉल और उच्चस्तरीय जांच की मांग उठाई। संत सुरक्षा को लेकर इंदौर में मौन जुलूस, राष्ट्रीय नीति व सुरक्षा प्रोटोकॉल लागू करने की मांग : रीवा हादसे के विरोध में जैन समाज ने सौंपा ज्ञापन, कलेक्टर से मुलाकात की मांग को लेकर कुछ देर चला प्रदर्शन


इंदौर। रीवा में हुई दुर्घटना में आर्यिका श्री श्रुतमति माताजी एवं आर्यिका श्री उपशममति माताजी के समाधिमरण के बाद संतों की सुरक्षा को लेकर जैन समाज में गहरा आक्रोश देखा जा रहा है। इसी क्रम में दिगंबर जैन समाज सामाजिक संसद, इंदौर के आह्वान पर सोमवार को राजवाड़ा से कलेक्टर कार्यालय तक मौन जुलूस निकाला गया। जुलूस में श्वेतांबर एवं दिगंबर समाज सहित विभिन्न सामाजिक एवं धार्मिक संगठनों के पदाधिकारी और कार्यकर्ता शामिल हुए।

कलेक्टर कार्यालय पहुंचकर एडीएम रोशन राय को प्रधानमंत्री एवं मुख्यमंत्री के नाम ज्ञापन सौंपा गया। सामाजिक संसद के निर्वाचित अध्यक्ष आनंद गोधा के नेतृत्व में दिए गए ज्ञापन में संतों की सुरक्षा को लेकर पांच प्रमुख मांगें रखी गईं।

महामंत्री हर्ष जैन एवं युवा प्रकोष्ठ अध्यक्ष राहुल जैन ने बताया कि ज्ञापन में रीवा दुर्घटना की उच्चस्तरीय जांच कराने, “संत सुरक्षा प्रोटोकॉल” लागू करने, राष्ट्रीय संत सुरक्षा नीति बनाने, संतों पर होने वाले अपराधों को विशेष संवेदनशील श्रेणी में शामिल करने तथा “संत सिक्योरिटी कोऑर्डिनेशन सेल” गठित करने की मांग की गई है।

जुलूस में करीब 130 मंदिरों के प्रतिनिधि, ब्रह्मचारी गण, महासमिति, तीर्थ क्षेत्र कमेटी, महावीर ट्रस्ट, श्री दिगंबर जैन सोशल ग्रुप फेडरेशन सहित ,उदासीन आश्रम एवं पंचबालयती आश्रम के भैया सहित कई जैन एवं हिंदू संगठनों के पदाधिकारी एवं समाजजन शामिल रहे।

इस दौरान निर्वाचित अध्यक्ष आनंद गोधा, विजय पाटोदी, नवीन गोधा, भरत मोदी, एम.के. जैन, हसमुख गांधी,अमीत कासलीवाल, नरेन्द्र वेद,रेखा संजय जैन, टी.के. वेद,प्रिंसपाल टोंग्या,अजय जैन मीन्टा, तल्लीन बड़जात्या, कान्तीलाल बम, राजीव जैन (पार्षद), मनोहर झांझरी, डी.के. जैन (डीएसपी), सचिन जैन उद्योगपति, स्वप्निल कोठारी, राकेश विनायका, अनूप गांधी, संजय पापड़ीवाल, अनिल जैन (जैनको), रितेश पाटनी, श्रीपाल जैन, आनंद कासलीवाल, श्रेष्ठी जैन, सारिका जैन, साधना दगड़े, रेखा जैन, उषा पाटनी, निधि जैन, मयंक जैन, राजेश काला, धर्मेंद्र जैन, अक्षय कासलीवाल, विनोद जैन, अक्षय बम एवं प्रदीप चौधरी सहित बड़ी संख्या में कार्यकर्ता उपस्थित रहे।

 

ज्ञापन सौंपे जाने के बाद अधिकांश समाजजन वापस लौटने लगे थे, लेकिन नकुल पाटोदी सहित कुछ युवा, महिला एवं समाज के कार्यकर्ता कलेक्टर से सीधे मुलाकात की मांग को लेकर वहीं बैठे रहे । इस दौरान विभिन्न संस्थाओं द्वारा अलग-अलग ज्ञापन भी सौंपे गए।

सामाजिक संसद ने बाद में स्पष्ट किया कि पूर्व में ही यह जानकारी दी गई थी कि ज्ञापन जिला प्रशासन को सौंपा जाएगा। प्रशासनिक प्रोटोकॉल के अनुसार कई बार कलेक्टर किसी आवश्यक कार्य में व्यस्त रहते हैं, ऐसी स्थिति में डिप्टी कलेक्टर या एसडीएम उनके प्रतिनिधि के रूप में ज्ञापन स्वीकार करते हैं और इसे प्रशासन द्वारा स्वीकार किया हुआ माना जाता है।

सामाजिक संसद ने कहा कि समाज हमेशा शांतिपूर्ण, संयमित एवं लोकतांत्रिक तरीके से अपनी बात प्रशासन तक पहुंचाने में विश्वास रखता है। सभी का उद्देश्य गुरुओं, आर्यिकाओं एवं मुनिराजों की सुरक्षा के लिए एकजुट होकर आवाज उठाना है, न कि किसी प्रकार का विवाद या अव्यवस्था उत्पन्न करना।

 

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