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भगवान नमिनाथ का मोक्ष कल्याणक महोत्सव सिद्धाचल पर्वत पर मनाया : विश्व शांति के लिए शांतिधारा और मोक्ष लाडू चढ़ाया 


गुरुवार को वैशाख मास कृष्ण पक्ष तिथि चतुर्दशी को मोक्ष पधारे मिथिला नगरी के राजा विजय एवं रानी वप्रा देवी के कोख से जन्मे 21वें तीर्थंकर देवाधिदेव 1008 भगवान नमिनाथ का मोक्ष कल्याणक महोत्सव दिवस बड़ी धूमधाम से सिद्धाचल पर्वत पर मनाया गया। ग्वालियर से पढ़िए, यह खबर…


ग्वालियर। गुरुवार को वैशाख मास कृष्ण पक्ष तिथि चतुर्दशी को मोक्ष पधारे मिथिला नगरी के राजा विजय एवं रानी वप्रा देवी के कोख से जन्मे 21वें तीर्थंकर देवाधिदेव 1008 भगवान नमिनाथ का मोक्ष कल्याणक महोत्सव दिवस बड़ी धूमधाम से सिद्धाचल पर्वत पर मनाया गया। 21वे तीर्थंकर भगवान नमिनाथ का ग्वालियर की प्राचीन धरोहर कोटेश्वर रोड पर स्थित सिद्धाचल पर्वत पर पंडित अनुभव शास्त्री के सानिध्य में अभिषेक ,पूजा, विश्व शांति के लिए शांतिधारा और मोक्ष लाडू चढ़ाया गया। फूप के इंजीनियर सुरेंद्र जैन, सुगनचंद अनिल कुमार जैन, प्रफुल्ल प्रसन्न कुमार जैन, सुरेंद्र कुमार जैन, महिला मंडल लोहा मंडी ग्वालियर और अनेक भक्तों ने बढ़-चढ़कर अपनी चंचला राशि से क्षेत्र की प्रगति में अपने को धन्य किया। प्रभारी पंकज जैन ने सभी को टीका लगा सम्मानित किया। वीरेंद्र जैन, सुनील जैन, माता त्रिशला तीर्थ कमेटी, सौरभ जैन अंबाह वाले, हिमांशु जैन ने सब का आभार व्यक्त किया।

 आत्मा को न कोई मार सकता है और न ही उत्पन्न कर सकता

पंडित अनुभव जैन शास्त्री ने निर्वाण लाडू की जानकारी देते हुए बताया कि लड्डू का आकर गोल होता है। लड्डू का न आदि है और न ही अंत है। साथ ही लड्डू को तैयार होने में कई प्रकार की परीक्षाओं से गुजरना पड़ता है। ठीक उसी प्रकार मानव देह में समाहित आत्मा की स्थिति है। आत्मा अविनाशी है। आत्मा न कभी मरती है और न पैदा होती है। आत्मा को न कोई मार सकता है और न ही उत्पन्न कर सकता है। वहीं, व्यक्ति को आत्म ज्ञान के लिए जीवन में विषम परिस्थिति से गुजरना पड़ता है। सर्दी, गर्मी, बरसात सभी मौसम में समभाव रह ईश्वर का सुमिरन करना पड़ता है। तब जाकर व्यक्ति को आत्म ज्ञान की प्राप्ति होती है। एक बार आत्म ज्ञान होने के बाद लंबे समय तक कठिन तप के बाद व्यक्ति को केवल ज्ञान की प्राप्ति होती है। अतः तीर्थंकर भगवान नमिनाथ को उनके निर्वाण तिथि पर लड्डू चढ़ाया जाता है।

भगवान नमिनाथ के चरणों का चिन्ह नीलकमल है

नीति जैन अंबाह ने बताया कि नीलकमल, भगवान नमिनाथ के चरणों का चिन्ह नीलकमल है। कमल की अनेक जातियां हैं तथा अनेक रंग हैं। जैसे श्वेत कमल, रक्त कमल, नीलकमल आदि परन्तु,सबकी प्रक्रति, गुण व स्वभाव एक जैसा ही होता है। नीलकमल की शोभा आंखों को बडी सुरमई व मोहक लगती है तथा शीतलता भी पहुंचाती है। कमल का मुख्य गुण है निर्लिप्तता। कमल हमें निष्काम और निर्लेप जीवन जीने की प्रेरणा देता है। कार्यक्रम के उपरांत सभी के स्वल्पाहार की व्यवस्था की गई थी।

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