मुनि श्री सर्वार्थ सागर जी महाराज ने कहा की नगर में आचार्य श्री विशुद्ध सागर जी के करकमलों से 8 वर्ष के छोटे-छोटे बच्चों का जैनत्व संस्कार कराया गया। इस पावन अवसर पर बच्चों को जैन धर्म के मूल सिद्धांत, अहिंसा, सत्य और सदाचार का महत्व बताया गया। अभिषेक अशोक पाटिल की यह रिपोर्ट…
सलेहा। मुनि श्री सर्वार्थ सागर जी महाराज जी ने कहा की नगर में आचार्य श्री विशुद्ध सागर जी के करकमलों से 8 वर्ष के छोटे-छोटे बच्चों का जैनत्व संस्कार कराया गया। इस पावन अवसर पर बच्चों को जैन धर्म के मूल सिद्धांत, अहिंसा, सत्य और सदाचार का महत्व बताया गया। गुरुदेव ने बच्चों को संस्कारित जीवन जीने की प्रेरणा देते हुए कहा कि बचपन से ही धर्म और संस्कारों का बीज बोया जाए तो वही आगे चलकर श्रेष्ठ व्यक्तित्व का निर्माण करता है। संस्कार के दौरान बच्चों ने धर्म के प्रति श्रद्धा और समर्पण का भाव प्रकट किया। कार्यक्रम में बड़ी संख्या में जैन समाज के लोग उपस्थित रहे और सभी ने इस पावन संस्कार को देखकर हर्ष व्यक्त किया। पूरे वातावरण में धर्म, भक्ति और उत्साह का अद्भुत दृश्य देखने को मिला।











Add Comment