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चातुर्मासिक प्रवचन में समझाया संत का सही मतलब : साधु संगत में जितना अधिक रहोगे, संस्कार उतने अधिक मिलेंगे- आचार्य श्री प्रमुख सागर महाराज


भगवान महावीर धर्मस्थल में उपस्थित आचार्य श्री प्रमुख सागर महाराज ने श्रोताओं को संबोधित करते हुए कहा कि धर्म से ही संस्कार मिलते हैं। उन्होंने गुवाहाटी नगरी की धर्म परायणता को आदर्श बताया और कहा कि साधु संगत में जितना अधिक रहोगे, संस्कार उतने अधिक मिलेंगे। पढ़िए सुनील कुमार सेठी की रिपोर्ट…


गुवाहाटी। स्थानीय फैंसी बाजार स्थित भगवान महावीर धर्मस्थल में उपस्थित आचार्य श्री प्रमुख सागर महाराज ने श्रोताओं को संबोधित करते हुए कहा कि धर्म से ही संस्कार मिलते हैं। उन्होंने गुवाहाटी नगरी की धर्म परायणता को आदर्श बताया और कहा कि साधु संगत में जितना अधिक रहोगे, संस्कार उतने अधिक मिलेंगे।

आचार्य श्री ने कहा कि अध्यात्म के आकाश में इंसानियत का इंद्रधनुष है, संत शत्रुता के शूल नहीं चुभाता, संत कलह के कांटे नहीं उगाता, संत वासनाओं के बताशे नहीं बांटता, संत षड्यंत्र के यंत्र नहीं बेचता। संत समाधिमरण का बीज देता है, संत आचरण का आशीष देता है, संत जागरण की ताबीज देता है, संत जो कभी नष्ट न हो, चीज देता है। उन्होंने उपस्थित श्रद्धालुओं को समझाते हुए कहा कि गंगा सिर्फ पाप का, चंद्रमा सिर्फ ताप का, कल्पवृक्ष सिर्फ अभिशाप का नाश करता है।

लेकिन संत का दर्शन पाप, ताप और अभिशाप तीनों का नाश करता हैं। इसलिए संत प्यार की पीढी़ पर परमात्माओं की प्रार्थना है। इससे पूर्व आज प्रात: चंद्रप्रभु चैत्यालय में आचार्य श्री ससंघ के सानिध्य में श्रीजी की शांतिधारा करने का परम सौभाग्य रतनमणी देवी सेठी व इंद्रा देवी छाबड़ा परिवार गुवाहाटी/ कोलकाता को प्राप्त हुआ। यह जानकारी समाज के प्रचार प्रसार विभाग के मुख्य संयोजक ओम प्रकाश सेठी एवं सह संयोजक सुनील कुमार सेठी ने दी।

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Shreephal Jain News

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