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आर्यिका गरिमामति, गंभीरमति के सान्निध्य में हुआ भव्य कार्यक्रम : उर्वशी दीदी जैनेश्वरी दीक्षा के बाद बनीं आर्यिका विख्यातमति माताजी


सांसारिक माया मोह से परे रहकर आत्मकल्याण के लिए लाखों रुपए की नौकरी का पैकेज छोड़कर डॉ.उर्वशी शाह (46 वर्षीय) ने एक जून को जैनेश्वरी दीक्षा ली। समाधिस्थ आर्यिका सुपार्श्वमति की शिष्या आर्यिका गरिमामति, गंभीरमति के सान्निध्य में ब्रह्मचारिणी डॉ. उर्वशी की जैनेश्वरी आर्यिका दीक्षा एक जून को नागालैंड के डीमापुर में हुई। पढ़िए यह विशेष रिपोर्ट…


डीमापुर। सांसारिक माया मोह से परे रहकर आत्मकल्याण के लिए लाखों रुपए की नौकरी का पैकेज छोड़कर डॉ.उर्वशी शाह (46 वर्षीय) ने एक जून को जैनेश्वरी दीक्षा ली। समाधिस्थ आर्यिका सुपार्श्वमति की शिष्या आर्यिका गरिमामति, गंभीरमति के सान्निध्य में ब्रह्मचारिणी डॉ. उर्वशी की जैनेश्वरी आर्यिका दीक्षा एक जून को नागालैंड के डीमापुर में हुई। इस अवसर पर दीदी का केश लोचन भी किया गया और उन्हें नवीन पिच्छी प्रदान की गई।असम, राजस्थान और अन्य जगहों से भक्त इस कार्यक्रम में भाग लेने पहुंचे। उर्वशी दीदी को आर्यिका दीक्षा के बाद आर्यिका विख्यातमति माताजी नाम दिया गया। कार्यक्रम की पुण्यार्जक कमला देवी सेठी, छवि कुमार सेठी, शीलचंद छवि कुमार सेठी परिवार रहा। इस अवसर ओमप्रकाश सेठी, प्रकाश चंद अजमेर, विमल बड़जात्या, अशोक चेड़ीवाल, विपिन कासलीवाल, कौशल अजमेरा, विकास सेठी सहित कई गणमान्य लोगों ने एक पुस्तक का विमोचन भी किया, जिसमें उर्वशी दीदी के दीक्षा पूर्व जीवन की संपूर्ण जानकारी है। गरिमामयी माताजी के पाद प्रक्षालन का सौभाग्य नरेंद्र कुमार, सुरेश कुमार, प्रदीप कुमार गोधा को प्राप्त हुआ।

पीएचडी हैं उर्वशी दीदी

श्री दिगबंर जैन पंचायत के अध्यक्ष महावीर जैन हथगोला और मंत्री बीरेंद्र कुमार सरावगी ने बताया कि डॉ.उर्वशी ने गुजरात से शिक्षा में बीफॉर्मा, एमफॉर्मा, पीएचडी( हर्बल ड्रग्स) की शिक्षा ली है। गुजरात के कॉलेज में लेक्चरर पद पर कार्य किया। इसके साथ ही यूएसए में एक कंपनी में फॉर्मासिस्ट के पद पर कार्य किया। वर्ष 2015 से 2018 में कनाड़ा में लगभग 50 लाख रुपए के आसपास के पैकेज में नौकरी की। परंतु संतुष्टि नहीं मिली। नौकरी करने के बाद आध्यात्म में जाने के साथ ही दीक्षा का मन बनाया। इसके बाद बड़ी बहन आर्यिका गरिमामति से आजीवन ब्रह्मचर्य व्रत और पंचम प्रतिमा व्रत की पालना ली। घर त्यागने के बाद बाल ब्रह्मचारिणी रहकर शादी भी नहीं की।

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