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अलग-अलग स्थानों पर भ्रमण कर 20 जून को पहुंचेगी : गणेश प्रसाद वर्णी की प्रतिमा ग्राम हंसेरा में स्थापित होगी


 गणेश प्रसाद वर्णी जी की 4 फुट की प्रतिमा ग्वालियर से वर्णी संस्थान विकास सभा सागर के अंतर्गत न्यायमूर्ति विमला जैन सुरेश चंद जैन आईएएस भोपाल के सहयोग से बनवाई गई है। रथ सारथी कपिल मलैया ने परिवार सहित प्रभावना रथ पुण्यार्जक के रूप में रथ को विधि विधान पूर्वक शुभारंभ कराया। यह प्रतिमा अलग-अलग स्थानों पर भ्रमण करते हुए उनके जन्म स्थान ललितपुर जिला के मड़ावरा ब्लाक के ग्राम हंसेरा में 20 जून को पहुंचेगी। पढ़िए मनीष जैन की विस्तृत रिपोर्ट…


सागर। गणेश प्रसाद वर्णी जी की 4 फुट की प्रतिमा ग्वालियर से वर्णी संस्थान विकास सभा सागर के अंतर्गत न्यायमूर्ति विमला जैन सुरेश चंद जैन आईएएस भोपाल के सहयोग से बनवाई गई है। रथ सारथी कपिल मलैया ने परिवार सहित प्रभावना रथ पुण्यार्जक के रूप में रथ को विधि विधान पूर्वक शुभारंभ कराया। यह प्रतिमा अलग-अलग स्थानों पर भ्रमण करते हुए उनके जन्म स्थान ललितपुर जिला के मड़ावरा ब्लाक के ग्राम हंसेरा में 20 जून को पहुंचेगी।

जीवन भर का लिया व्रत

समाजसेवी कपिल मलैया ने बताया कि वर्णी जी असाटी समुदाय के थे। जबकि असाटी ज्यादातर वैष्णव होते हैं, उनके पिता की णमोकार मंत्र में गहरी आस्था थी। वे एक जैन परिवार के पड़ोस में रहते थे और मंडावरा में अपने घर के पास जैन मंदिर जाते थे। वहां के व्याख्यानों से प्रभावित होकर दस वर्ष की आयु में उन्होंने जीवन भर सूर्यास्त से पहले भोजन करने का संकल्प लिया। उन्होंने बताया कि गणेश प्रसाद वर्णी ने सत्य, अहिंसा, संयम का जीवन व्यापी व्रत ग्रहण किया। उन्होंने अशिक्षा के अंधकार में डूबे समाज को उजियारे की किरणें प्रदान की। जीवन में कठोर श्रम और संघर्षों के बीच सफलता के बीज बोये। पूरे जीवन भर उन्होंने परिस्थितियों को अपने उद्देश्य के सामने नत-मस्तक कराया। विपरीत परिस्थितियों में उन्होंने सत्य-अहिंसा को अपना कर आगमी मार्ग को ही प्रचारित और पुष्पित किया। समाज, राजनीति एवं समय के साथ समझौता नहीं किया। जगह-जगह पाठशालाएं, विद्यालय खुलवाये, लेकिन न तो अर्थ संग्रह और न व्यवस्था को अपने हाथ कभी रखा। बालचंद सवालनवीस के प्रोत्साहन और कंड्या, मलैया और अन्य परिवारों और सिंघई कुंदनलाल आदि के समर्थन से उन्होंने सतर्क -सुधातारिंगिनी जैन पाठशाला की स्थापना में मदद की, जो अब सागर में प्रसिद्ध गणेश दिगंबर जैन संस्कृत विद्यालय के नाम से पहचानी जाती है।

ये भी रहे मौजूद

इस अवसर पर मनीष विद्यार्थी रथ संयोजक, प्रीति मलैया, अनुष्का मलैया, डॉ. हरिश चंद जैन शास्त्री, जीवन्धर शास्त्री जबलपुर, संजय शास्त्री पावला, सुनील शास्त्री दलपतपुर, राजकुमार कर्द, सुरेश शास्त्री सागर, राजेंद्र शास्त्री दलपतपुर, संजय शास्त्री तिगोड़ा, उत्तमचंद, आशीष शास्त्री सीकर, विमल शास्त्री सागर आदि उपस्थित थे।

वर्णी जी द्वारा स्थापित शैक्षणिक संस्थाएं – 1. स्याद्वाद महाविद्यालय बनारस, 2. श्री गणेश दिगंबर जैन संस्कृत महाविद्यालय, सागर, 3. श्री दिगंबर जैन महिला आश्रम सागर, 4. श्री दिगंबर जैन पार्श्वनाथ विद्या मंदिर बरूआसागर (झांसी), 5. पुष्पदंत दिगंबर जैन विद्यालय शाहपुर, 6. श्री गणेश दिगंबर जैन गुरूगुल उच्च. माध्य. विद्यालय जबलपुर, 7. श्री दिगंबर जैन वर्णी इंटर कालेज ललितपुर, 8. जैन गुरूकुल हायर सेकेण्डरी स्कूल खुरई, 9. ज्ञानवर्धक जैन पाठशाला इटावा, 10. श्री कुंद-कुंद जैन स्नातकोत्तर महाविद्यालय खतौली मुजफ्फरनगर, 11. श्री शांतिनाथ जैन संस्कृत विद्यालय सिद्धक्षेत्र अहारजी टीकमगढ़, 12. श्री पार्श्वनाथ दिगंबर जैन हायर सेकेण्डरी स्कूल ईसरी झारखंड, 13. सगन्तभद्र विद्यालय देहली, 14. श्री महावीर दिगंबर जैन संस्कृत विद्यालय साडूमल ललितपुर, 15. गुरूदत्त दिगंबर जैन संस्कृत विद्यालय द्रोणगिरी छतरपुर, 16. वर्णी दिगंबर जैन संस्कृत विद्यालय रेशंदीगिरी, 17. श्री गणेश वर्णी दिगंबर जैन गुरूकुल पटनागंज रहली सागर, 18. शांति निकेतन दिगंबर जैन संस्कृत विद्यालय कटनी, 19. श्री वर्णी उच्च. माध्य. शाला मड़ावरा, 20. श्री वर्णी इंटरकालेज विदिशा, 21. दिगंबर जैन वर्णी गुरूकुल सहारनपुर, 22. हीरापुर में पाठशाला, 23. शाहगढ़ में पाठशाला, 24. दलपतपुर में पाठशाला, 25. बकस्वाहा में पाठशाला, 26. बंडा में पाठशाला, 27. नीमटोरिया में पाठशाला, 28. भगवां में पाठशाला, 29. जनता हाई स्कूल बड़ामलहरा में पाठशाला, 30. गोरखपुर में पाठशाला, 31. सतपारा में पाठशाला, 32. मढ़देवरा में पाठशाला, 33. सैदपुर में पाठशाला, 34. सतना में पाठशाला, 35. कुरहैडी में पाठशाला, 36. एटा में पाठशाला, 37. बबीना में पाठशाला, 38. दरगुंवा में पाठशाला, 39. बरायठा में पाठशाला, 40. घुवारा में पाठशाला, 41. बड़गांव कटनी में पाठशाला, 42. त्रिशलानंदन पाठशाला गौराबाई जैन मंदिर, सागर, 43. जैन पाठशाला चौधरी मंदिर गढ़ाकोटा।

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