पहली बार चातुर्मास को छोड़कर मुंगावली में मुनि पुंगव श्रीसुधासागरजी महाराज ससंघ के सान्निध्य में भव्य मोजी बंधन समारोह किया गया। मुंगावली से पढ़िए, राजीव सिंघई मोनू की यह खबर…
मुंगावली। पहली बार चातुर्मास को छोड़कर मुंगावली में मुनि पुंगव श्रीसुधासागरजी महाराज ससंघ के सान्निध्य में भव्य मोजी बंधन समारोह किया गया। जिसमें उल्लास के साथ सैकड़ों बच्चों को मुनि पुगंव श्री सुधासागरजी महाराज के साथ संघ में विराजमान 18 संतों ने विभिन्न मंत्रों को सभी के सिर पर एक साथ स्थापित कर संस्कारों का शंखनाद किया। इसके पहले समारोह का भव्य शुभारंभ दोपहर में आचार्य श्री का संगीत के साथ पूजन से हुआ। इसके बाद पूर्व दिशा के साथ उत्तर पश्चिम दक्षिण दिशाओं विराजमान जितने भी केवली भगवान पंच परमेष्ठि भगवान सहित सिद्ध क्षेत्र अतिशय क्षेत्र को साक्षी मान कर वंदना करते हुए सभी की अमृत स्नान करते शुद्धि की क्रिया की गई। इसके बाद नवतिलक की क्रिया की गई। वहीं सभी मोजी बंधन करने वाले को रक्षा मंत्रों से वेष्टित करते हुए आठों दिशाओं का वंदन किया गया। इसके बाद मुख्य पात्र राहुल अरविंदकुमार बजाज, दर्शन जैन, सुरेश कुमार ललितपुर, अलका जैन जबलपुर परिवार, प्रभादेवी गदियाना परिवार, कोषाध्यक्ष परिवार राहुल जैन मुंगावली को मुख्य यजमान के रूप में मुनि पुंगव श्रीसुधासागरजी महाराज के कर कमलों से सबसे पहले संस्कार कराने का सौभाग्य प्राप्त किया
मौजी बंधन के दौरान यह क्रियाएं हुई
इस दौरान पंच नमस्कार मंत्र के साथ ही चतारी दंडक के साथ ही सम्यक दर्शन के आठों अंग की स्थिति, क्रिया,
सम्य दर्शन, सम्यक ज्ञान, सम्यक चारित्र के संस्कार स्थपित किए। सत्वतत्व सम्राज्य पद ग्रहण करवाया। वात्सल्य एवं प्रभावना, परम निर्माण पद ग्रहणकर अष्ट मद रहित अष्टमूल गुणों सहित शब्द गामी मंत्रों से संस्कारित किया गया। साथ ही परम निर्माण पद ग्रहण ग्रहण स्वहा अपने हाथों से केशर से एक-एक बीज मंत्र की मस्तक पर स्थापित किया। मयूर पिच्छिका से आशीर्वाद दिया।
जब संघ भैया जी को भी किया गया मोजी बंधन संस्कार से संस्कारित
मध्यप्रदेश महासभा संयोजक विजय धुर्रा ने बताया कि पहली बार संघ में विराजमान घर छोड़कर आए हुए सभी बाल ब्रह्मचारी भाईयों को भी मोजी बंधन समारोह में मुख्य यजमानों के बाद एक-एक कर मंच पर मुनि पुंगव श्री सुधासागर जी महाराज ने अपने कर कमलों से भक्तों की तालियों एवं जय जयकार के बीच संस्कारित किया। इस दौरान सभी के मस्तक पर केशर से लेखन करते हुए मंत्रोच्चार किया गया।
भेंट और पुरस्कार में मिली चीज को बेचना नहीं है
इसके पहले आज सुबह धर्मसभा को संबोधित करते हुए मुनि पुगंव श्री सुधासागरजी महाराज ने कहा कि
कहीं से भी भेंट मिले उसे स्वीकार करने में संकोच नहीं करना चाहिए। भेंट एक सम्मान है जब आप लोग ससुराल जाते हैं तो आपकी सासु मां कुछ देती है। उसे आप लोग लेते हैं या वह हेकड़ी दिखाकर सौ रुपए के नोट को वापस कर देते हैं। ये राशि सम्मान निधि कहलाती है। आप इसको वसीयत बनाकर रख सकते हैं। रखना ही चाहिए है। भेंट और पुरस्कार में मिली चीज को बेचना नहीं है। उसका सदुपयोग करना वह सीख पूज्य पुरुष देते हैं। उसे खर्च मत करना,उसे सुरक्षित कर लेना।













Add Comment