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मुनि श्री समता सागर संघ का सतना की ओर मंगल विहार : प्रभाषगिरी क्षेत्र पर समवसरण मंदिर का शिलान्यास संपन्न


पावन प्रभाषगिरी पर्वत पर, जहां भगवान पदमप्रभु को केवलज्ञान की प्राप्ति हुई और दिव्य समवसरण की रचना हुई थी, उस ऐतिहासिक एवं आध्यात्मिक स्थल पर क्षेत्र कमेटी द्वारा भव्य समवसरण मंदिर निर्माण का संकल्प लिया गया। मुनि श्री समतासागर महाराज, मुनि श्री पवित्रसागर महाराज, मुनि श्री पूज्यसागर महाराज, मुनि श्री अतुलसागर महाराज, ऐलक श्री निश्चयसागर, ऐलक श्री निजानंदसागर एवं क्षुल्लक श्री संयमसागर जी ससंघ के सानिध्य में भव्य समवसरण मंदिर का शिलान्यास समारोह अत्यंत श्रद्धा और उल्लास के साथ संपन्न हुआ। पढ़िए अविनाश जैन ‘विद्यावाणी’ की रिपोर्ट…


कौशाम्बी नगरी। पावन प्रभाषगिरी पर्वत पर, जहां भगवान पदमप्रभु को केवलज्ञान की प्राप्ति हुई और दिव्य समवसरण की रचना हुई थी, उस ऐतिहासिक एवं आध्यात्मिक स्थल पर क्षेत्र कमेटी द्वारा भव्य समवसरण मंदिर निर्माण का संकल्प लिया गया। संत शिरोमणि आचार्य श्री विद्यासागर जी महाराज के परम प्रभावक शिष्य एवं आचार्य समय सागर महाराज के आज्ञानुवर्ती निर्यापक श्रमण मुनि श्री समतासागर महाराज, मुनि श्री पवित्रसागर महाराज, मुनि श्री पूज्यसागर महाराज, मुनि श्री अतुलसागर महाराज, ऐलक श्री निश्चयसागर, ऐलक श्री निजानंदसागर एवं क्षुल्लक श्री संयमसागर जी ससंघ के सानिध्य में भव्य समवसरण मंदिर का शिलान्यास समारोह अत्यंत श्रद्धा और उल्लास के साथ संपन्न हुआ।

मुख्य शिला स्थापना का सौभाग्य

मुख्य शिला स्थापना का सौभाग्य इलाहाबाद निवासी डॉ. प्रेमचंद्र जैन के सुपुत्र अनूप जैन एवं श्रीमती रेखा जैन, शेखर जैन एवं श्रीमती मृदुला जैन, अभिलाष जैन एवं श्रीमती अनिता जैन को प्राप्त हुआ। साथ ही समवसरण में विराजमान होने वाले चतुर्मुखी भगवान की दो प्रतिमाओं को विराजित करने का पुण्य अवसर भी इन्हीं परिवारों को प्राप्त हुआ। अन्य शिलाओं को स्थापित करने का सौभाग्य आमोद जैन, बंटी जैन (कानपुर) सहित अनेक दानदाताओं ने प्राप्त किया।

विधि-विधान से संपन्न हुए धार्मिक अनुष्ठान

इस अवसर पर प्रतिष्ठाचार्य ब्रह्मचारी संजय भैया (मुरैना) एवं अनूप भैया (विदिशा) ने विधि-विधानपूर्वक सभी धार्मिक अनुष्ठानों को संपन्न कराया। कार्यक्रम में ब्र. दादा राजाराम जी (नन्ही देवरी), ब्र. रिंकू भैया, ब्र. सनत भैया, ब्र. सोनू भैया, ब्र. शैलेष भैया, ब्र. राकेश भैया सहित अनेक ब्रह्मचारी एवं गुरुभक्त उपस्थित रहे। साथ ही सौरभ जैन (सुल्तानगंज), सुमतचंद जैन (बीना), नीरज जैन, सौम्य जैन (बम्हौरी), वीरेन्द्र जैन (हरपालपुर), ब्र. बबीता दीदी, ब्र. शिमला दीदी, ब्र. प्रीति दीदी, ब्र. मौना दीदी, ब्र. सोमती दीदी, ब्र. वैशाली दीदी सहित अनेक श्रावक-श्राविकाओं की गरिमामयी उपस्थिति में कार्यक्रम संपन्न हुआ।

विभिन्न क्षेत्रों से उमड़ी श्रद्धालुओं की भीड़

इस अवसर पर कटनी, कैमोर, बीना, जेसी नगर एवं आसपास के ग्रामों, चंपाहा, सराय किंम, कौशाम्बी, इलाहाबाद, बरगद, प्रतापगढ़, मजगंवा आदि से बड़ी संख्या में धर्मानुरागी बंधु उपस्थित होकर धर्म प्रभावना में सहभागी बने।

मुनि संघ का सतना की ओर मंगल विहार

मध्यान्ह में निर्यापक मुनि श्री समता सागर महाराज एवं मुनि श्री पवित्र सागर महाराज ससंघ ने सतना की ओर मंगल विहार प्रारंभ किया, जबकि मुनि श्री पूज्यसागर महाराज एवं मुनि श्री अतुलसागर महाराज अभी प्रभाषगिरी पर ही विराजमान हैं।

दस माह की यात्रा बनी अविस्मरणीय

लगभग दस माह तक निर्यापक श्रमण समतासागर महाराज के नेतृत्व में मुनि संघ तथा आर्यिका गुरुमतिमाता जी एवं आर्यिका दृणमतिमाता जी के कुशल संचालन में आर्यिका संघ ने पूज्य गुरुदेव के आशीर्वाद से इस विस्तृत यात्रा को सफलतापूर्वक संपन्न किया, जो क्षेत्रों के लिए एक अमिट स्मृति बन गई है।

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