समाचार

तपस्वियों के अलंकरण समारोह में व्यक्त किए विचार : तपस्या ही हमारे जीवन का अलंकार है- मुनि श्री प्रमाण सागर महाराज  


जो व्यक्ति तप को धारण करता है, उसका जीवन तो अलंकृत होता ही है; उन्हें अलंकृत करने वाले भी अलंकृत हो जाते हैं। यह उद्गार शंका समाधान प्रेणता मुनि श्री प्रमाण सागर महाराज ने मोहताभवन में आयोजित इंटरनेशनल एसोसिएशन जैन फोरम द्वारा आयोजित तपस्वियों के अलंकरण समारोह में व्यक्त किए। मुनि श्री ने कहा कि तप की अनुमोदना ही धर्म की अनुमोदना है। पढ़िए राजेश जैन दद्दू की रिपोर्ट…


इंदौर। जो व्यक्ति तप को धारण करता है, उसका जीवन तो अलंकृत होता ही है; उन्हें अलंकृत करने वाले भी अलंकृत हो जाते हैं। यह उद्गार शंका समाधान प्रेणता मुनि श्री प्रमाण सागर महाराज ने मोहताभवन में आयोजित इंटरनेशनल एसोसिएशन जैन फोरम द्वारा आयोजित तपस्वियों के अलंकरण समारोह में व्यक्त किए। मुनि श्री ने कहा कि तप की अनुमोदना ही धर्म की अनुमोदना है। उन्होंने जैन फोरम की प्रशंसा करते हुए कहा कि समग्र जैन समाज के तपस्वियों का आज सम्मान किया जा रहा है, यह बहुत ही प्रशंसनीय तथा अनुकरणीय है। उन्होंने धर्म के स्वरूप को सामने रखते हुए कहा कि “अहिंसा, संयम, तप” तथा “दर्शन, ज्ञान, चारित्र” ही धर्म का मूल है; इन्हें ही सामने रखना चाहिए, बाकी सभी बातें गौण हो जानी चाहिए। तभी हम अपने आपको तथा अपने जैन धर्म को बचा पाएंगे।

उन्होंने कहा कि “पंथ कभी भी एक नहीं हो सकते, हां पंथी एक हो सकते हैं।” हम सभी पंथाग्रही न बनें, बल्कि सभी पंथ अपनी-अपनी धार्मिक क्रियाओं को अपने पंथ के अनुरूप ही करते हुए किसी के ऊपर अपनी क्रिया को थोपने की कोशिश न करें, तो शायद हम अपने जैन धर्म को आगे बढ़ाने में सफल होंगे।

किसी की पूजा पद्धति पर न जाएं

मुनि श्री ने कहा कि सारी दुनिया जैन धर्म के अनेकांत की ओर देख रही है, जो समूची दुनिया में शांति स्थापित करने की क्षमता रखती है। क्या हम मुट्ठीभर जैन एक होकर नहीं रह सकते? उन्होंने कहा कि पंथाग्रही नहीं बनो, भगवान महावीर के उस पथ के राही बनें जिसमें हम दिगंबर, स्वेताम्बर, मूर्तिपूजक, स्थानक बासी, जो भी हैं, उनके पंथ को तो बदला नहीं जा सकता। यदि बदला जा सकता होता, तो 2500 वर्ष निकल गए और पूर्व में भी बहुत बड़े आचार्य हुए, जिन्होंने भी प्रयास किए होंगे। लेकिन मेरा ऐसा मानना है कि हम किसी की पूजा पद्धति पर न जाएं। जिसकी जो भी मान्यता है, वह मंदिर, उपाश्रय और उनके पूजास्थल तक रहे। जब हम उससे बाहर निकलें, तो एक मात्र जैन होकर निकलें, तभी हम अपने धर्म और धर्मायतनों की रक्षा कर पाएंगे। गुरु देव ने यह बात जोर देकर कही कि आज साधर्मी वैक्सीने की बहुत बड़ी आवश्यकता है। यह दुर्लभ मनुष्य जीवन मिला है, और आप सभी ने तपस्या के इस मार्ग को अंगीकार किया है। सभी की तपस्या सार्थक हो, सभी मोक्षमार्गी बनें, इसी मंगल भावना के साथ आचार्य श्री की ये पक्तियां “तन मिला तुम तप करो, करो कर्म का नाश, रबि-शशि से भी अधिक है तुम में दिव्यप्रकाश” के साथ सभी आयोजकों को आशीर्वाद प्रदान किया।

सभी प्रेम और वात्सल्य से रहें

इस अवसर पर मुनि श्री निर्वेग सागर महाराज एवं मुनि श्री संघान सागर महाराज के साथ स्वेताम्बर पंथ के राजेश मुनि एवं साध्वियां उपस्थित रहीं। राजेश मुनि ने संबोधित करते हुए कहा कि कितनी छोटी सी समाज है और छोटा सा जीवन है, हम सभी प्रेम और वात्सल्य से रहें। जैन समाज अपरिग्रही समाज है, किसी के भी धर्मायतनों पर कब्जा नहीं करती। यदि हम किसी का सम्मान न कर पाए, तो किसी का अपमान न करें। उन्होंने कुत्ता और गधा की कहानी सुनाते हुए कहा कि दोनों में होड़ लगी कि जो चार चौराहे के पार सिंहासन पर पहले पहुंच जाएगा, वह राजा बनेगा। सभी जानते थे कि गधा धीरे-धीरे चलता है। अतः कुत्ता भी आश्वस्त था कि वह अपने गंतव्य तक पहुंचेगा। दौड़ प्रारंभ हुई। कुत्ता सबसे पहले पहले चौराहे पर पहुंचा। जैसे ही वह वहां पहुंचा, उसे चौराहे के कुत्तों ने घेर लिया और वह उनसे जैसे-तैसे निपटा। आगे बढ़ा तो यही स्थिति दूसरे और तीसरे चौराहे पर रही। इस बीच गधा धीरे-धीरे आगे बढ़ रहा था। और जब तक चौथे चौराहे पर कुत्ता पहुंचता, उसके पहले ही गधा सिंहासन पर विराजमान हो चुका था। इस कहानी की प्रेरणा से आप सभी लोग समझ चुके होंगे।

तपवस्यिों का सम्मान

कार्यक्रम में समग्र जैन समाज के लगभग पांच सौ तपस्वियों का सम्मान किया गया। कार्यक्रम के शुभारंभ में आचार्य श्री के चित्र के समक्ष दीप प्रज्जवलन जैन फोरम, धर्मप्रभावना समिति के पदाधिकारियों द्वारा किया गया। कार्यक्रम का संचालन अभय भैया जी एवं राजेश चौरड़िया ने किया। जैन फोरम के मीडिया प्रभारी राजेश जैन दद्दू एवं प्रवक्ता अविनाश जैन विद्यावाणी ने बताया कि अतिथियों तथा तपस्वियों का सम्मान धर्म प्रभावना समिति के अध्यक्ष अशोक डोसी, नवीन जैन गोधा, मुकेश पाटौदी, महामंत्री हर्ष जैन एवं जैन फोरम के प्रमुख कातीलाल बंम, अशोक मेहता, प्रकाश चंद भटवेरा, अशोक मांडलिक, राजेश जैन दद्दू, मयंक जैन, प्रदीप बडजात्या, केलाश लुहाड़िया, शिरीष जैन, डीके जैन, साधना मदावत, अनामिका बाकलीवाल, रानी डोशी, मुक्ता जैन सहित सभी पदाधिकारियों ने किया।

आप को यह कंटेंट कैसा लगा अपनी प्रतिक्रिया जरूर दे।
+1
2
+1
0
+1
0
Shreephal Jain News

About the author

Shreephal Jain News

Add Comment

Click here to post a comment

You cannot copy content of this page