Tag - तप

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साधु संत चलते फिरते तीर्थ हैं – मुनिश्री विबोधसागर जी : साधु संत संयमी जीवन की प्रेरणा देते हैं – मुनिश्री विलोकसागर

मुरैना के बड़े जैन मंदिर में आयोजित धर्मसभा में मुनिश्री विलोकसागरजी और मुनिश्री विबोधसागरजी ने साधु संतों के महत्व पर प्रवचन दिया। उन्होंने कहा कि जैन साधु...

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40 श्रावकों ने गोचरी दया में भाग लिया जिनशासन की सेवा की : गोचरी दया के अवसर पर लघु नाटिका का किया मंचन

एक दिन का साधु जीवन पुण्यदायक तप के समान है। एक का साधु जीवन व्यतीत कर गृहस्थ श्रावकों को तप साधना से रूबरू होने का अवसर प्रदान करती है गोचरी दया। यह विचार...

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दसलक्षण महापर्व पर बड़ा मंदिर सरस्वती भवन में 25 व्रतियों का सम्मान : समाजजनों ने व्रतियों के संयम, तप, आराधना की अनुमोदना की 

स्थानीय बड़ा मंदिर सरस्वती भवन में मंगलवार को रत्नत्रयी 25 व्रतियों का सम्मान किया गया। इस अवसर पर बड़ी संख्या में समाजजन मौजूद रहे। समाजजनों ने व्रतियों के तप...

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धामनोद में जैन समाज ने दश लक्षण महापर्व का भव्य आयोजन : तपस्वियों और बाल ब्रह्मचारियों के साथ श्री जी की पालकी शोभा यात्रा निकली

धामनोद में दश लक्षण महापर्व के अंतिम दिन जैन समाज ने श्री जी की पालकी के साथ भव्य चलसमारोह आयोजित किया। नगर भ्रमण में श्रावक, श्राविकाओं और तपस्वियों की...

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झुमरीतिलैया में दश लक्षण व्रतधारी अंकित जैन ठोलिया का जैन समाज ने सम्मान : 10 दिनों तक अन्न जल त्यागने वाले अंकित जैन को मिला नगर भ्रमण के साथ पुरस्कार

झुमरीतिलैया में जैन समाज ने दश लक्षण महापर्व में 10 दिन उपवास रखने वाले अंकित जैन ठोलिया का सम्मान किया। नगर भ्रमण और भजन संगीत के साथ कार्यक्रम को भव्य रूप से...

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महरौनी में दशलक्षण महापर्व का भव्य समापन : दस धर्मों की साधना और भक्ति से गूंजा नगर

महरौनी के श्री अजित नाथ बड़ा जैन मंदिर में भाद्रपद शुक्ल पंचमी से शुरू हुआ दशलक्षण महापर्व आज ब्रह्मचर्य धर्म के साथ सम्पन्न हुआ। दस दिनों तक नगर में भक्ति...

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आईटी सिटी बैंगलोर में युवा और उनके परिवार धर्म की ओर अग्रसर : दस उपवास कर रहे श्रावक-श्राविकाओं का विशेष सम्मान

बैंगलोर में जैन मंदिरों में दशलक्षण महापर्व को श्रद्धा और भक्ति के साथ मनाया गया। दस उपवास करने वाले श्रावक-श्राविकाओं का विशेष सम्मान किया गया और उनके तप एवं...

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कविता काष्ठरथ: प्रतीके सौहार्द्र: शांति-सद्भाव के लिए रथोत्सव पर भावपूर्ण कविता

पर्युषण पर्व के समापन पर प्रतिवर्ष निकाले जाने वाले रथोत्सव पर भावपूर्ण और अहिंसा, शांति, विश्व बंधुत्व, भातृत्व भाव, संयम, त्याग, तप, तपस्या आदि धर्म का पालन...

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पर्युषण पर्व में आचार्य श्री बोले – इन्द्रियों पर विजय ही सबसे बड़ी तपस्या : तपश्चरण से जीवन में निखार और परिणामों में निर्मलता – आचार्य निर्भय सागर

ललितपुर में पर्युषण पर्व के दौरान आचार्य श्री निर्भय सागर महाराज ने धर्मसभा में कहा कि तप आत्मा को निर्मल बनाता है और इन्द्रियों पर विजय ही सबसे बड़ी साधना है।...

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संत समागम से जीवन निर्मल और धर्म का मार्ग प्राप्त होता है : आचार्य श्री वर्धमान सागर जी ने धर्म और स्वाध्याय का महत्व समझाया

धर्म सभा में आचार्य श्री वर्धमान सागर जी ने संत समागम, स्वाध्याय, अभिषेक पूजन और धर्म के महत्व पर प्रकाश डाला। उन्होंने जीवन निर्मल होने, सम्यक दर्शन प्राप्त...

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