Tag - तप त्याग

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रत्न्त्रय धर्म 13 प्रकार का चारित्र, 14 वें गुण स्थान पहुंचने का माध्यम : आचार्य श्री वर्धमान सागर जी ने सरल शैली में जैन सिद्धांतों का ज्ञान कराया 

श्री चंद्र प्रभ जिनालय बड़ के बालाजी में संघ सहित विराजित आचार्य श्री वर्धमान सागर जी द्वारा दिया गया संवाद, गीत और धर्म-ज्ञान अत्यंत प्रेरणादायक रहा। पाठशाला...

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आचार्य श्री वर्धमान सागर जी सहित सप्त ऋषि संघ का 55 वर्ष बाद शिवाड़ में हुआ भव्य मंगल प्रवेश : राग–द्वेष और मोहनीय कर्म का त्याग करने पर ही मिलता है ‘शिव’ अर्थात मोक्ष मार्ग: आचार्यश्री

आचार्य श्री वर्धमान सागर जी महाराज सहित सप्त ऋषि संघ का 55 वर्षों बाद शिवाड़ में भव्य मंगल प्रवेश हुआ। धर्मसभा में आचार्यश्री ने राग, द्वेष, क्रोध, मान, माया...

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आर्यिका श्री वत्सलमती माताजी ने टोंक अतिशय क्षेत्र में किया वैराग्यमय केशलोचन : आचार्य वर्धमान सागर जी के सान्निध्य में सम्पन्न हुआ तपपूर्ण केशलोचन भाविकों ने की अनुमोदना

टोंक अतिशय क्षेत्र में आचार्य वर्धमान सागर जी महाराज के सान्निध्य में आर्यिका श्री वत्सलमती एवं आर्यिका श्री प्रेक्षा मति माताजी ने अहिंसा एवं अपरिग्रह की...

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आचार्य वर्धमान सागर बोले-वैराग्य, व्रत संयम और रत्नत्रय से संवेग भावना जाग्रत होती है: 15 अगस्त का संदेश — जैसे देश आज़ाद हुआ, वैसे ही आत्मा को भी कर्म बंधन से मुक्त कराना है

आचार्य श्री वर्धमान सागर जी ने 16 कारण भावना अंतर्गत संवेग भावना की विस्तृत विवेचना करते हुए कहा कि मनुष्य जीवन में वैराग्य, व्रत संयम और रत्नत्रय से ही सच्चा...

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आत्मा का वास्तविक घर सिद्धालय सात राजू ऊपर स्थित है : विनयसंपन्नता भावना मोक्ष का द्वार है – आचार्य श्री की मंगल देशना

टोंक में सोलहकारण भावना पर्व के अंतर्गत आज दूसरी विनयसंपन्नता भावना का दिवस मनाया गया। आचार्य वर्धमान सागर जी ने धर्मसभा में विनय को मोक्ष का द्वार बताते हुए...

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