चारित्र चक्रवर्ती आचार्य शांतिसागरजी का आचार्य पद प्रतिष्ठापन शताब्दी वर्ष मनाने के हुए गठित राष्ट्रीय कमेटी में पद्म विभूषण धर्माधिकारी डॉ. डी. वीरेन्द्र...
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बीसवीं सदी में दिगम्बर जैन श्रमण संस्कृति के प्रथमाचार्य चारित्र चक्रवर्ती 108 आचार्यश्री शांतिसागरजी महाराज के आचार्य पद प्रतिष्ठान का 100वां वर्ष 2024 में...
सम्यक ज्ञान समीचीन ज्ञान है। समीचीन ज्ञान स्वाध्याय तप संयम के माध्यम से अपनी शक्ति सामर्थ्य को प्रकट करें। इससे सम्यक दर्शन, ज्ञान और चरित्र प्राप्त होता है।...
आप बहुमंजिला इमारतों में रहते हैं, लेकिन तीन खंड वास्तविक मकान को आप भूल रहे हैं। पहला खंड हमारी आत्मा, दूसरा खंड शरीर, और तीसरा खंड मन। इसमें आत्मा प्रथम खंड...
जगत परिवर्तनशील है। हम पर्यावरण पानी की उपेक्षा का परिणाम देख व भोग रहे हैं। पानी सबके लिए जरूरी है विश्व में भारत की जनसंख्या बहुत अधिक है। हमें पानी का महत्व...
राष्ट्र गौरव दिगम्बर जैनाचार्य 108 श्री वर्धमान सागर जी महाराज का इस वर्ष का पावन वर्षायोग मेवाड़-वागड़ की राजधनी, झीलों की नगरी उदयपुर में होगा। पढ़िए अशोक...
मुख्यमंत्री अशोक गहलोत ने सोमवार को उदयपुर के मोहनलाल सुखाड़िया विश्वविद्यालय में ग्लोबल इंस्टीट्यूट ऑफ जैनोलॉजी और प्राकृत भवन का शिलान्यास किया। इस अवसर पर...
आचार्य श्री वर्धमान सागर जी महाराज ससंघ का प्रभात नगर सेक्टर 5 से मंगल बेला में सेक्टर 11 के लिए विहार प्रारंभ हुआ। कृषि उपज मंडी पर श्री आदिनाथ पंचकल्याणक...
जिनवाणी का पालन करना हमारा कर्तव्य है। जिनागम जीवन का दर्पण है। दर्पण को देखकर शरीर का श्रृंगार कर बाहर जाते हो, जबकि जिनागम रूपी दर्पण से आत्मा का स्वरूप पता...
सभी को जिनेंद्र प्रभु का दर्शन करना चाहिए। जिनेंद्र प्रभु के दर्शन श्रद्धा और विनय के साथ करना चाहिए। यह मंगल प्रवचन अशोक नगर की धर्म सभा में आचार्य शिरोमणि...








