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चारित्र चक्रवर्ती आचार्य शांतिसागरजी का आचार्य पद प्रतिष्ठापन शताब्दी वर्ष : वीरेन्द्र हेगड़े धर्मस्थल और अशोक पाटनी परम शिरोमणि संरक्षक मनोनीत


चारित्र चक्रवर्ती आचार्य शांतिसागरजी का आचार्य पद प्रतिष्ठापन शताब्दी वर्ष मनाने के हुए गठित राष्ट्रीय कमेटी में पद्म विभूषण धर्माधिकारी डॉ. डी. वीरेन्द्र हेगड़े धर्मस्थल और दानवीर भामाशाह अशोक पाटनी (आर के मार्बल) को परम शिरोमणि संरक्षक मनोनीत किया गया है। अनिल सेठी, बेंगलुरु की अध्यक्षता में एक कमेटी के गठन को स्वीकृति मिली है। पढ़िए राजेंद्र जैन महावीर की रिपोर्ट…


उदयपुर। चारित्र चक्रवर्ती आचार्य शांतिसागरजी का आचार्य पद प्रतिष्ठापन शताब्दी वर्ष मनाने के हुए गठित राष्ट्रीय कमेटी में पद्म विभूषण धर्माधिकारी डॉ. डी. वीरेन्द्र हेगड़े धर्मस्थल और दानवीर भामाशाह अशोक पाटनी (आर के मार्बल) को परम शिरोमणि संरक्षक मनोनीत किया गया है। अनिल सेठी, बेंगलुरु की अध्यक्षता में एक कमेटी के गठन को स्वीकृति मिली है। गौरवाध्यक्ष दिनेश खोड़निया, प्रदीप जैन (पीएनसी, आगरा), राजेन्द्र कटारिया, अहमदाबाद, महामंत्री राकेश सेठी कोलकाता, कार्याध्यक्ष शांतिलाल बेलायत, उदयपुर, कोषाध्यक्ष कैलाश पाटनी किशनगढ़, संयोजक संजय पापड़ीवाल किशनगढ़, सुरेश सबलावत, जयपुर को मनोनीत किया गया है। प्रारंभिक तौर पर रीजनल चेयरमैन विनोद डोडनवार बेलगांव, राजेश शाह उदयपुर, पवन गोधा दिल्ली, हंसमुख गांधी इन्दौर, प्रकाशचंद बड़जात्या चैन्नई, जमनालाल हपावत उदयपुर को बनाया गया। राष्ट्रीय सभा को दानवीर भामाशाह अशोक पाटनी आर. के. मार्बत, अनिल सेठी बेंगलूर, विनोद डोड्डनवार बेलगांव, संजय पापड़ीवाल किशनगढ़, राजेश शाह उदयपुर, पवन गोधा दिल्ली, प्रकाशचंद बड़जात्या चैन्नई, जमनालाल रूपावत उदयपुर, उदयपुर नगरनिगम उपमहापौर पारस सिंघवी, हेमंत सोगानी पदमपुरा, प्रभुलाल जैन सलुम्बर, राजेन्द्र जैन ‘महावीर’ सनावद आदि ने संबोधित कर अनेक सुझावों से अवगत कराया। अशोक पाटनी सहित सभी ने तन-मन-धन से सहयोग करने की घोषणा महोत्सव के लिए की।

सभी को जोड़ने की अपील

संचालन राकेश सेठी कोलकाता ने करते हुए महोत्सव को विश्वव्यापी बनाने की बात कही। अशोक पाटनी ने कहा कि ड्राइवर अच्छा हो तो सभी जुड़ते चले जाते हैं। अनिल सेठी ने कहा कि आचार्य शांतिसागरजी के नाम पर कोई मतभेद नहीं है, सभी जुड़ेंगे और हम सफल होंगे। उन्होंने चिंता व्यक्त की कि अनेक आयोजनों के नाम पर हमारा अनापशनाप खर्च बंद होना चाहिए। जैन समाज के पास जो है, वह अन्य किसी के पास नहीं है। विनोद डोड्डनवार ने कहा कि समडोली में आचार्य पद मिला था। पूज्य कर्मयोगी स्वस्तिश्री चारुकीर्ति भट्टारक स्वामी ने भी आचार्य पद प्रतिष्ठापन शताब्दी वर्ष महोत्सव मनाने के भाव रखे थे । प्रकाशचंद बड़जात्या ने कहा कि पूरे देश में तीन करोड़ से अधिक जैन हैं व तीस करोड़ से अधिक लोगों को रोजगार देते हैं, सबको संगठित होना चाहिए। राष्ट्रीय सभा में गुवाहाटी, कोलकाता, इन्दौर, दिल्ली, किशनगढ़, इचलकरंजी, बेलगाम, समडोली, सलुम्बर, धरियावाद, चेन्नई, मुंबई, अहमदाबाद, बेंगलुरु, राजस्थान आदि अनेक प्रदेशों से गुरु भक्तों ने सहभागिता की। सभी ने उत्साह पूर्वक शताब्दी महोत्सव को मनाने का संकल्प लिया।

जैनत्व के उन्नयन के लिए कार्य किए

उल्लेखनीय है कि कर्नाटक के भोज में सन् 1872 में जन्मे बालक सातगौड़ा ने बरनाल में सन् 1920 में मुनि दीक्षा ग्रहण कर सन् 1924 समडोली में आचार्य पद प्राप्त किया था। संपूर्ण देशभर में पद विहार कर उन्होंने बीसवी सदी में दिगम्बरस्व के विस्तार व जैनत्व के उन्नयन के लिए अनेकों कार्य किये। वर्तमान में 1500 से अधिक पिच्छीधारी संत उनका स्मरण कर मोक्षमार्ग पर अग्रसर हैं। उनकी पट्ट परम्परा के पट्टाधीश आचार्य के रूप में आचार्यश्री वर्धमानसागरजी विगत सन् 1990 से उक्त पद पर शोभायमान हैं।

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