भगवान पार्श्वनाथ का ज्ञान कल्याणक (केवलज्ञान) 7 मार्च शनिवार को देश भर के दिगंबर जैन मन्दिर, चैत्यालय में पारंपरिक रूप से मनाया जा रहा है। श्रीफल जैन न्यूज की विशेष श्रृंखला में आज पढ़िए, उप संपादक प्रीतम लखवाल की यह संकलित और संपादित प्रस्तुति…
इंदौर। भगवान पार्श्वनाथ का ज्ञान कल्याणक (केवलज्ञान) 7 मार्च शनिवार को देश भर के दिगंबर जैन मन्दिर, चैत्यालय में पारंपरिक रूप से मनाया जा रहा है। तिथि के अनुसार चैत्र कृष्ण चतुर्थी के दिन मनाया जाता है। भगवान पार्श्वनाथ जी को कैवल्य ज्ञान चैत्र कृष्ण चतुर्थी को वाराणसी के समीप अहिच्छत्र में हुआ था। 30 वर्ष की आयु में गृह त्याग के बाद 83 दिनों की कठोर तपस्या के बाद 84 वें दिन उन्हें लोकालोकप्रकाशी केवलज्ञान प्राप्त हुआ। यह दिव्य ज्ञान उन्हें धात्री नामक वृक्ष के नीचे प्राप्त हुआ। भगवान के ज्ञान कल्याणक पर समूचे भारत वर्ष में शनिवार को भक्ति का अनुपम अनुष्ठान किए जा रहे हैं। इस दिन भगवान के अभिषेक, शांतिधारा, विधान पूजन आदि धार्मिक कार्य किए जा रहे। हैं। ज्ञान प्राप्ति के बाद आपने सत्य, अहिंसा, अस्तेय, और अपरिग्रह का संदेश दिया। इस पावन अवसर पर इंद्रों ने समवसरण की रचना की और केवलज्ञान की पूजा की। यह दिन आत्म-ज्ञान और साधना की सर्वोच्चता का प्रतीक माना जाता है।
ज्ञान कल्याणक की मुख्य बातें:
अहिच्छत्र (कुछ मान्यतानुसार काशी/वाराणसी के समीप चैत्र कृष्णा चतुर्थी (विशाखा नक्षत्र)। तपस्या के बाद कमठ के उपसर्गों को शांत कर वे ‘केवलज्ञानी’ बने।प्रभु ने चतुर्र्विध संघ (श्रमण, श्रमणी, श्रावक, श्राविका) की स्थापना की। ज्ञान प्राप्ति के बाद आपने सत्य, अहिंसा, अस्तेय, और अपरिग्रह का संदेश दिया। इस पावन अवसर पर इंद्रों ने समवसरण की रचना की और केवलज्ञान की पूजा की। यह दिन आत्म-ज्ञान और साधना की सर्वोच्चता का प्रतीक माना जाता है













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