जिनवाणी का पालन करना हमारा कर्तव्य है। जिनागम जीवन का दर्पण है। दर्पण को देखकर शरीर का श्रृंगार कर बाहर जाते हो, जबकि जिनागम रूपी दर्पण से आत्मा का स्वरूप पता लगता है। यह बात आचार्य श्री वर्धमान सागर महाराज ने प्रभात नगर में धर्मसभा में कही। पढ़िए राजेश पंचोलिया की रिपोर्ट…
उदयपुर। जिनेंद्र भगवान ने दिव्य ध्वनि में जो कहा ,उसे गौतम गणधर स्वामी ने जिनवाणी के माध्यम से प्रसारित किया। आचार्य देवों ने जिनवाणी में अंकित किया। जिन वाणी से जिनागम प्राप्त हुआ। भगवान की वाणी देशना में जो भगवान ने कहा, वही जिनवाणी है। जिनवाणी का पालन करना हमारा कर्तव्य है। जिनागम जीवन का दर्पण है। दर्पण को देखकर शरीर का श्रृंगार कर बाहर जाते हो, जबकि जिनागम रूपी दर्पण से आत्मा का स्वरूप पता लगता है। संसार परिभ्रमण में कर्मों का आश्रव होकर बंध हुआ है। सभी संसारी प्राणियों ने कर्मों को संग्रहित कर रखा है। जन्मों के पुण्य से मनुष्य जन्म मिलता है। कर्मों के उदय से शुद्ध कर्म से पुण्य और अशुभ कर्म से पाप का उदय होता है। यह बात आचार्य श्री वर्धमान सागर महाराज ने प्रभात नगर में धर्मसभा में कही।
सभी को परिणामों को सुधारने की जरूरत
आचार्य श्री ने बताया कि धर्म- पुरुषार्थ से कर्मों का नाश किया जा सकता है। जिनागम भगवान की वाणी है। जिनालय में विधिपूर्वक आगम अनुसार भगवान के दर्शन- अभिषेक पूजन करना चाहिए। यह धर्म का अंग है। आप सभी को परिणामों को सुधारने की जरूरत है। शरीर की बजाय आत्मा का चिंतन करें। ज्ञान दर्शन से कर्मों का फल अनुभव सुख-दुख महसूस करते हैं। धर्म-पुरुषार्थ से मोक्ष पुरुषार्थ फल प्राप्त होता है। पांच का अर्थ पंच परमेष्ठी और पांच महाव्रत का प्रतीक है। देव-शास्त्र-गुरु का अनुसरण कर प्रभात नगर में नया प्रभात आपके जीवन में आए, यही मंगल भावना करते हैं।
इन्हें मिला सौभाग्य
मदनलाल गंगवाल अध्यक्ष, सुरेश लुणादिया उपाध्यक्ष, सुमति प्रकाश महामंत्री, महावीर प्रसाद कोषाध्यक्ष ने बताया कि धर्म सभा में मंगलाचरण ज्योति वालावत ने किया। चित्र एवं दीप प्रवज्वलन रमेश पार्षद, राजेश पंचोलिया इंदौर, श्रीपाल धर्मावत, मदनलाल गंगवाल ने किया। आचार्य श्री के चरण प्रक्षालन का सौभाग्य सुरेश लुणादिया एवं इंद्र मल फंदोत परिवार ने प्राप्त किया। शास्त्र भेंट करने का सौभाग्य देवीलाल हीरालाल परिवार को प्राप्त हुआ। दोपहर को 64 रिद्धि विधान का आयोजन सेक्टर पांच में किया गया। शाम को श्रीजी की आरती के बाद आचार्य श्री की भक्ति भाव पूर्वक मंगल आरती की गई।













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