आचार्य श्री वर्धमान सागर जी ने अपने मंगल उद्बोधन में कहा कि संसार में प्रत्येक प्राणी को जैसे लौकिक परिजनों से प्रीति होती है, ठीक वैसी प्रीति देव, शास्त्र...
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जिस प्रकार अमृत का पान करने से व्यक्ति अमर हो जाता है, उसी प्रकार ज्ञान रूपी अमृत सरोवर से आप अमरता रूपी सिद्धालय को प्राप्त कर सकते हैं और चिर काल हमेशा के...








