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अभिषेक,शांति धारा के बाद हुए उत्तम शौच धर्म पर धर्म प्रवचन : मनाया गया पुष्पदंत नाथ भगवान का मोक्ष कल्याणक

राजधानी के सब से प्राचीन लगभग 150 वर्ष पुराने श्री आदिनाथ दिगंबर जैन बड़ा मंदिर मालवीय रोड रायपुर में दसलक्षण पर्युषण महापर्व के अवसर के चौथे दिन उत्तम शौच...

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धर्म सभा में दिए उत्तम मार्दव धर्म पर प्रवचन: जो दूसरों के दुख को देखकर दुखी हो जाता है, उसी का नाम है मार्दव धर्म – मुनिपुंगव श्री सुधासागर जी महाराज

धर्मात्मा की पहचान है क्रिया, कुछ न कुछ करता हुआ पाया जाएगा। धर्म हमें सक्रिय करता है। 24 घण्टे में तुम कोई क्रिया करो, तुम्हारी हर प्रवृत्ति में धर्म की...

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उत्तम क्षमा पर दिए प्रवचन : दूसरे से गलती हुई है और फिर क्रोध न आए, उसका नाम है उत्तम क्षमा धर्म है – मुनिपुंगव श्री सुधासागर जी महाराज

 त्योहार धर्मात्मा बनाता है और पर्व धर्म बनाता है। कितने त्योहार होते हैं वह किसी न किसी धर्मात्मा से जुड़े होते हैं, व्यक्तिगत होते हैं। जब- जब धर्मात्मा किसी...

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धर्मसभा में दिए प्रवचन : गुणहीन व्यक्ति यदि गुणवानों से प्रशंसा सुनकर आनंदित होता है तो वह लूला लंगड़ा, अंधा और बहरा होता है – मुनि श्री सुधासागर जी महाराज

 हम पुण्यात्मा हैं हम शक्तिमान हैं, हम साधु हैं, हम भगवान हैं, जितना अपने आप को ऊंचा उठा सको उठाओ क्योंकि हमने आपसे कहा था कि तुम अपने आप को जितना नीचे गिरा...

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उपाध्यायश्री विहसंतसागर जी महाराज ससंघ का मिला सानिध्य : आचार्य विद्यासागर संत निलय हॉल में आयोजित हुई बुद्धिजीवी संगोष्ठी 

मेडिटेशन गुरु उपाध्यायश्री विहसंत सागर जी महाराज ससंघ के सानिध्य एवं अर्पितमय पावन वर्षायोग समिति के तत्वावधान में कमलानगर स्थित डी ब्लॉक के आचार्य श्री...

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धर्मसभा में दिए प्रवचन : आत्महत्या से बड़ा कोई पाप नहीं हो सकता- मुनि श्री सुधासागर महाराज

यदि आपको कभी ऐसी अनुभूति हो कि पुण्यहीन हूं, मेरे से आगे कोई है, जब तुम्हें छोटेपन की अनुभूति हो कि मैं किसी से छोटा हूं, गरीब हूं, मैं बुद्धिहीन हूं, मेरी...

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धर्मसभा में दिए प्रवचन : परिवार मेरे साथ नहीं रहता है, मैं परिवार के साथ रहता हूं – मुनिपुंगव श्री सुधासागर जी महाराज

धन तो सब चाह रहे हैं लेकिन तरीके इतने भिन्न हैं कि एक धन कमाकर सेठ बन जाता है और एक धन कमाकर डाकू बन जाता है। दोनों की दृष्टि धन पर है लेकिन वह धन से प्रभावित...

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धर्मसभा में दिए प्रवचन : बड़ा आदमी वह है जो छोटों को गले लगाता है – मुनिपुंगव श्री सुधासागर जी महाराज

सम्यकचारित्र को प्राप्त करना कठिन नहीं है यदि सम्यकज्ञान हो जाये तो। यदि ज्ञान तुम्हारा समीचीन है तो चारित्र भी कोई दूर नहीं है और सम्यक्दर्शन यदि तुम्हें हो...

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धर्मसभा में दिए प्रवचन : सहायता उनकी करो जिसका कोई सहारा नहीं : मुनि श्री सुधासागर जी महाराज

हम अपने आप को सबसे छोटा, सबसे बड़ा मूर्ख समझें, अज्ञानी होकर नही, ज्ञानी होकर। दूसरा व्यक्ति हमें मूर्ख कहे उसके पहले कहना मैं तो मूर्ख हूं ही, कौन सा बुरा बोल...

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धर्मसभा में दिए प्रवचन : बड़े लोग जब प्रशंसा करें तो समझना ये आग है : निर्यापक मुनिपुंगव श्री सुधासागर जी महाराज

हम अच्छाई को समझें या ना समझें, हमें बुराई का ज्ञान होना चाहिए। हम कितने ही गुण लेकर बैठे रहें, एक अवगुण सारे गुणों को गन्दा कर देता है। हजार खुशियां जिंदगी भर...

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