शास्त्रों में कहा कि विपरीत वृत्ति वालों के प्रति मध्यस्थ भाव रखना चाहिए, माध्यस्थ भाव रखना हमारा धर्म या स्वभाव नहीं है, हमारी मजबूरी है क्योंकि सामने वाला...
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सागर। जितना एक व्यक्ति अच्छा बनने का प्रयास कर रहा है, उतना वह अच्छा नहीं बन पा रहा है। जितनी ऊंचाई को छूने का प्रयत्न कर रहा है, उतना ऊंचा उठ नहीं पा रहा।...
श्री गणेश प्रसाद वर्णी की 151वीं जन्म जयंती के उपलक्ष्य में वर्णी भवन मोराजी में विविध कार्यक्रमों के साथ भव्य आयोजन किया गया। सुबह प्रभात फेरी, ध्वजारोहण और...
मुनिपुंगव श्री सुधासागर जी महाराज ने क्षमावाणी पर्व के अवसर पर अपने प्रवचन में कहा, “शराब, सिगरेट या गुटखा खाना पाप नहीं है, परंतु मां को निपूती करना...
आध्यात्मिक संत, युग पुरुष, पू. गणेश प्रसाद जी वर्णी जी की 151वीं जन्म जयंती कार्यक्रम वर्णी भवन मोराजी सागर एवं प्रतिमा लोकार्पण कार्यक्रम हंसेरा मड़ावरा उत्तर...
संत शिरोमणि आचार्य गुरुदेव विद्यासागरजी महामुनिराज के निर्यापक श्रमण मुनि श्री सुधासागर जी महाराज जो कि सागर में चातुर्मास कर रहे है एवं मुनि श्री समता सागर जी...
धर्म समझाया नहीं जाता, समझा जाता है लेकिन संसार में व्यक्ति समझना नहीं चाहता, समझने की चेष्टा भी नहीं करना चाहता और समझाए कोई तो मानना नहीं चाहता। परिणाम...
धर्मायतनों व समाजहितों के संरक्षण, संवर्धन हेतु सागर में जैन समाज का प्रदेश स्तरीय सम्मेलन का आयोजन 12 अक्टूबर को होने जा रहा है । सम्मेलन में सहयोग हेतु...
धर्म वह नहीं है जो पर वस्तु को ग्रहण करने की बात करें, जब व्यक्ति के मन में एक अनुभूति जागती है कि मैं अपने आप में पूर्ण हूं जो हमारा है वही हमारा है। एक धर्म...
क्रोध प्रायः चेतन पदार्थ से जागता है, मायाचारी व्यक्ति भी जीव को फंसाता है, मान भी अकड़ता है तो जीव के सामने अकड़ता है, इन तीनो कषायों में जीव की प्रधानता है...








