मुनि श्री सुधा सागर जी ने महाराज ने प्रवचन में कहा, “आंख तुम्हें मिली है, दर्शन कर सकते हो, लेकिन मन नहीं हो रहा है। समझ लो, धर्म ने तुम्हारी आंख को...
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शास्त्रों में कहा कि विपरीत वृत्ति वालों के प्रति मध्यस्थ भाव रखना चाहिए, माध्यस्थ भाव रखना हमारा धर्म या स्वभाव नहीं है, हमारी मजबूरी है क्योंकि सामने वाला...
भाग्योदय तीर्थ क्षेत्र में सोमवार शाम अचानक अफरातफरी का माहौल बन गया। लोग इधर से उधर भागने लगे, क्योंकि अस्पताल के मेडिकल में आग लग गई। देखते ही देखते 15 से 20...
धर्म समझाया नहीं जाता, समझा जाता है लेकिन संसार में व्यक्ति समझना नहीं चाहता, समझने की चेष्टा भी नहीं करना चाहता और समझाए कोई तो मानना नहीं चाहता। परिणाम...
धर्म वह नहीं है जो पर वस्तु को ग्रहण करने की बात करें, जब व्यक्ति के मन में एक अनुभूति जागती है कि मैं अपने आप में पूर्ण हूं जो हमारा है वही हमारा है। एक धर्म...
क्रोध प्रायः चेतन पदार्थ से जागता है, मायाचारी व्यक्ति भी जीव को फंसाता है, मान भी अकड़ता है तो जीव के सामने अकड़ता है, इन तीनो कषायों में जीव की प्रधानता है...
राजधानी के सब से प्राचीन लगभग 150 वर्ष पुराने श्री आदिनाथ दिगंबर जैन बड़ा मंदिर मालवीय रोड रायपुर में दसलक्षण पर्युषण महापर्व के अवसर के चौथे दिन उत्तम शौच...
धर्मात्मा की पहचान है क्रिया, कुछ न कुछ करता हुआ पाया जाएगा। धर्म हमें सक्रिय करता है। 24 घण्टे में तुम कोई क्रिया करो, तुम्हारी हर प्रवृत्ति में धर्म की...
त्योहार धर्मात्मा बनाता है और पर्व धर्म बनाता है। कितने त्योहार होते हैं वह किसी न किसी धर्मात्मा से जुड़े होते हैं, व्यक्तिगत होते हैं। जब- जब धर्मात्मा किसी...
कभी कार्य करने के पहले भाग्य को, भगवान को बीच में मत लाना चाहे अच्छा कार्य हो या बुरा। बस इनसे तो आशीर्वाद ले ओ कि आप तो मुझे आशीर्वाद दो कि मेरा शगुन हो।...








