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धर्म तीर्थ का प्रवर्तक जीव, तीर्थंकर कहलाता है : आचार्यश्री वर्धमानसागर जी ने तीर्थंकारों के उपदेश, नाम और स्वरूप का किया वर्णन 

दर्शन विशुद्धि आदि 16 कारण भावना को चिंतन भाने से तीर्थंकर नाम कर्म की सातिशय पुण्य प्रकृति का बंध होता है। आचार्य श्री वर्धमान सागर जी ने श्री चंद्रप्रभ...

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