आचार्यश्री वर्धमानसागर जी ने कहा कि दशलक्षण पर्व में अनेक पर्व समाहित हैं। प्रतिदिन आप दशलक्षण धर्म और इंद्र ध्वज महामंडल विधान की पूजन कर रहे हैं। सात राजू...
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मन वचन और काय की पवित्रता से शुचिता आती है : आचार्य श्री वर्धमान सागर जी ने बताया सत्य धर्म का रहस्य
विधानाचार्य कीर्तिय के निर्देशन में पंचामृत अभिषेक के बाद इंद्र ध्वज मंडल विधान की पूजन प्रतिदिन चल रही है। आचार्य श्री द्वारा पूजन के मध्य पूजन के द्रव्यों को...
दशलक्षण पर्व के तृतीय उत्तम आर्जव दिवस पर आचार्य श्री वर्धमानसागर जी ने अपनी देशना में कह कि भगवान की इंद्रध्वज मंडल विधान की पूजन सामान्य बात नहीं है। बहुत...
पंचकल्याणक से प्रतिमाओं में अतिशय बढ़कर पूजनीय हो जाती है। पुरानी टोंक में श्री पार्श्वनाथ भगवान का पंच कल्याणक संघ सानिध्य में आगामी 7 से 12 नवंबर तक होगा।...
आत्मा की रक्षा, इंद्रियों को विषय भोगों राग द्वेष से नियंत्रित संकुचित करें। साधु की भांति सम्यक समता भाव धर्म धारण करें। यह प्रेरणादायी वाणी आचार्य श्री...
आचार्यश्री वर्धमानसागरजी महाराज नगर में विराजित होकर चातुर्मास कर रहे हैं। उनके यहां नित प्रवचनों का धर्मलाभ स्थानीय समाजजनों के साथ बाहर से आए श्रद्धालुजन भी...
इस वर्षायोग में प्रथमाचार्य श्री शांति सागर जी महाराज का आचार्य पद शताब्दी महोत्सव भी वर्ष भर मनाया जाएगा। यह मंगल देशना आचार्य श्री वर्धमान सागर जी महाराज ने...
रत्न स्वर्ण के समवशरण में विराजित भगवान के पुण्य प्रताप से पाषाण के मान स्तंभ को देखकर मान-अभिमान गलित नष्ट हो जाता है। यह धर्म देशना संघ सहित विराजित आचार्य...
संसारी प्राणी सुख और शरण की खोज करते हैं। रोगी डॉक्टर की शरण में जाते हैं, आपत्ति और कष्ट आने पर आप भगवान को याद करते हैं। देव शास्त्र गुरु के अलावा अन्य कोई...
आचार्य श्री शांतिसागरजी महाराज का आचार्य पद प्रतिष्ठापना शताब्दी महोत्सव आचार्य श्री वर्धमान सागर जी महाराज ससंघ के सान्निध्य में मनाया जा रहा है। आचार्य पद...








